- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटा पंच स्थानी निर्वाचन कार्यालय
- नगर निकाय चुनाव में मतदाता सूची को लेकर आयी थी भारी शिकायतें
- जनपद के लाखों मतदाता हो गए थे इधर-उधर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। लोकसभा चुनाव के जैसे-जैसे चरण समाप्त होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे जनपदीय निर्वाचन कार्यालय अगले चुनाव की तैयारी में लग गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से इस तरफ से दिशा निर्देश जारी हो चुके हैं। अब साल 2020 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होगा, जिसके लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम होना है। लेकिन इस बार मतदाता सूची इस लोकसभा चुनाव में तैयार विधानसभा निर्वाचक नामावली को सामने पुनरीक्षित होगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव साल 2015 में हुए थे। जिसमें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव कराए गए थे। निर्वाचित पंचायत बोर्ड का कार्यकाल वर्ष 2020 में पूरा होने जा रहा है। लेकिन इससे पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करना है। पंचायत चुनाव ग्राम पंचायत निर्वाचक नामावली से होते हैं, जबकि नगर निकाय के चुनाव निकाय निर्वाचक नामावली और विधानसभा व लोकसभा चुनाव विधानसभा निर्वाचक नामावली से होते हैं। इन अलग-अलग मतदाता सूची को लेकर इस बार नगर निकाय चुनाव में खासा बखेड़ा हुआ था। जिन लोगों ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वोट डाली थी, वह नगर निकाय चुनाव की मतदाता सूची में उस क्षेत्र से गायब हो गए। बड़ी संख्या में लोगों के नाम ही नहीं मिले तो बड़ी संख्या में ऐसे भी मतदाता रहे, जिनके वोट दूसरे क्षेत्रों में नजर आए। इस मामले की शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग में भी की गई थी।
इसी शिकायत को मद्देनजर रखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए मतदाता सूची को तैयार कराने का निर्देश दिया गया है। इस बार मतदाता सूची विधानसभा निर्वाचक नामावली को सामने रखकर तैयार होगी। बीएलओ मतदाता सूची का पुनरीक्षण इसी आधार पर करेंगे। यह दिशा निर्देश तीन दिन पूर्व मेरठ आए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार भी दे गए हैं।
जिला पंचायत का चुनाव हो सकता है सीधे
नगर निगम में पहले मेयर का चुनाव निर्वाचित पार्षद करते थे। लेकिन बाद में इसमें संशोधन करते हुए महापौर का चुनाव सीधे कर दिया गया। लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव अभी भी निर्वाचित सदस्य करते हैं। जिसमें सत्ता के दबाव के बीच भारी खरीद फरोख्त होती है। इसकी लगातार शिकायत के बीच ये चुनाव भी सीधे जनता के द्वारा ही कराए जाने की मांग हो रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शासन ने भी इस पर सहमति जताई है। ऐसे में पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता के द्वारा किया जा सकता है।