स्वच्छता के प्रति जागरूक हो रही महिलाएं
बिजनौर। संकीर्ण सोच का दायरा टूट रहा है, ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है तो सोच भी बदल रही है। एक साल पहले तक जिले में मात्र ढाई हजार ग्रामीण महिलाएं ही सेनेटरी पैड का इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन एक साल के भीतर यह आंकड़ा बढ़कर 30 हजार तक पहुंच गया है।
महिलाओं की विशेष दिनों की परेशानी को अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन में उठाया गया था। एक साल पहले तक पहले तक गांवों में महिलाएं इस पर बात करने से भी बचती थी। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़े बता रहे हैं कि गांवों में महिलाएं जागरूक हो रही हैं। जिले में गांवों में करीब छह लाख घर हैं। पिछले साल कराए गए एक सर्वे के अनुसार जिले में इन परिवारों में करीब सात लाख महिलाएं हैं। सर्वे में केवल ढाई हजार महिलाओं ने ही सेनेटरी पैड के इस्तेमाल की बात कही थी। शेष महिलाएं कपड़ा ही प्रयोग करती हैं। एक महीना पहले किए गए सर्वे में 30 हजार से अधिक महिलाओं ने सेनेटरी पैड इस्तेमाल की बात कही है। 35 प्रतिशत की वृद्धि पैड का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में हुई हैं। हालांकि अभी भी पैड के बजाए कपड़े का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या काफी अधिक हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर दिखेगा।
स्कूलों में मुफ्त बांटे जा रहे पैड
शासन ने भी बालिकाओं को भी सेनेटरी पैड से जोड़ा है। परिषदीय स्कूलों में बालिकाओं को मुफ्त में सेनेटरी पैड बांटे जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों को भी सेनेटरी पैड बांटने में लगाया गया है। इसके प्रयोग व लाभ के बारे में महिलाओं को बताया जा रहा है।
बनाई जा रहीं भट्ठी
गांवों में सेनेटरी पैड को इस्तेमाल के बाद नष्ट करने के लिए भट्ठी बनाई जा रही हैं, जहां पैड को नष्ट किया जाएगा। परिषदीय स्कूलों में भी ये भट्ठी बनाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग की ओर से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी भट्ठी बनाई जा रही हैं।
कपड़े का इस्तेमाल खतरनाक: डा.सीमा
करन हॉस्पिटल की संचालिका डा.सीमा देशवाल के अनुसार महिलाओं और छात्राओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए। गंदे कपड़े के इस्तेमाल से महिलाओं को अनेक बीमारी हो सकती हैं। कई बार ये बीमारी बहुत बढ़ भी जाती हैं। अगर सेनेटरी पैड का इस्तेमाल किया जाए तो महिलाओं को ये बीमारी नहीं होंगी।