सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उलमा खफा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। तीन तलाक के मुद्दे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम संस्थाओं और उलमाओं में हलचल शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर छह माह की रोक का आदेश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार को छह महीने में प्रस्ताव पारित कर नया कानून बनाने को कहा है।
तीन तलाक के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर मुस्लिम वर्ग सहित गैर-मुस्लिमों की निगाहें टिकी थीं। मंगलवार को गुदड़ी बाजार स्थित शहर काजी जैनुस साजिद्दीन के आवास पर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। जबकि शहर के मुख्य उलमाओं ने भी शहर काजी के आवास की ओर रुख किया।
फैसले का सम्मान करेंगे
तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे। लेकिन तीन तलाक पर छह महीने की रोक शरीयत के खिलाफ है। शरीयत और हदीस की रोशनी में ही कानून बनेगा तो माना जाएगा।- जैनुस साजिद्दीन शहरकाजी
एक तबके ने गलत इस्तेमाल किया
महिलाओं के लिए शरीयत में तीन तलाक फायदे के लिए बनाया गया था। लेकिन मुस्लिम वर्ग के एक तबके ने लोगों ने इसका गलत इस्तेमाल किया। जिससे मामला कोर्ट तक पहुंचा है। लेकिन कोर्ट को मुस्लिमों की भावनाओं का मद्देनजर ही फैसला लेना चाहिए था। कारी अनवार अहमद, शहर अध्यक्ष जमियत उलमा-ए-हिंद
तलाक पर रोक शरीयत के खिलाफ
कोर्ट के फैसले का विरोध तो नहीं करेंगे, लेकिन छह महीने के लिए तलाक पर रोक लगाना शरीयत के खिलाफ है। केंद्र सरकार को मामले में कानून बनाने को कहा गया है। सरकार ऐसा कोई कानून न बनाये जिससे मुस्लिम वर्ग के लोग और उनकी भावनाओं को कोई ठेस पहुंचे। - मौलाना अब्बास, सदर मदरसा महमूदिया
असमंजस की स्थिति पैदा हो गई
कोर्ट के आदेश के बाद मुस्लिम वर्ग में एक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। छह महीनों में केंद्र सरकार को तीन तलाक पर नया कानून बनाना होगा। शरीयत के मामलात को ध्यान में रखते हुए सरकार को कानून बनाने पर चर्चा करनी चाहिए। सैय्यद असअद जिलानी, जमियत उलमा सेक्रेटरी
मुस्लिमों को ध्यान में रखकर बनाएं कानून
तीन तलाक मामला उठा है तो फैसला तो आना ही था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन शरीयत और हदीस को मानने वाले मुस्लिमों का ध्यान रखते हुए केंद्र को कानून बनाना चाहिए। मौलाना जावेद अहमद
खास बात
तीन तलाक के मुद्दे पर आए फैसले पर दीं विभिन्न प्रतिक्रियाएं