अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट का रास्ता साफ होने जा रहा है। पिछले कई महीनों से फंड न मिलने के कारण प्रोजेक्ट में देरी हो रही थी। दिल्ली सरकार की तरफ से हर बार फंड के लिए आनाकानी की जा रही थी। लेकिन इस प्रोजेक्ट के फंड के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार से फंड देने को कहा है। प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने दिल्ली सरकार को इस प्रोजेक्ट के लिए 265 करोड़ रुपये पर्यावरण मुआवजा खर्च करने को कहा है। जिससे इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।
82 किलोमीटर का यह प्रोजेक्ट सितंबर-2018 से शुरू किया जाना था। लेकिन धन की कमी और अन्य कार्यों के पूरे न होने के चलते कार्य शुरू नहीं हो सका है। हालांकि, नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन की तरफ से प्रोजेक्ट का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पहले चरण के लिए सड़क चौड़ीकरण, बिजली शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, हाल ही में मोहन नगर के पास पाइल लोड टेस्टिंग का कार्य शुरू हो गया है।
13 किमी का हिस्सा है दिल्ली में
इस प्रोजेक्ट में 13 किलोमीटर का हिस्सा दिल्ली सरकार में आ रहा है। जिसके चलते सरकार को इस प्रोजेक्ट में सहयोग करना है। दिल्ली क्षेत्र में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार स्टेशन आ रहे हैं। वहीं, प्रोजेक्ट का पहला स्टेशन ही सराय काले खां है।
केंद्र सरकार ने भी दिया बजट
हाल ही में केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम के लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जिससे इस प्रोजेक्ट पर पहले चरण का कार्य शुरू किया जा सके। पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक निर्माण कार्य को शुरू किया जाना है।
प्राधिकरण ने प्रोजेक्ट बताया जरूरी
दिल्ली के बीच से गुजरने वाले इस प्रोजेक्ट को प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण बताया है। प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि इस प्रोजेक्ट पर 31632 करोड़ रुपये कुल खर्च किया जाना है। जितना पैसा प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार को देना है, वह प्रदूषण मुआवजे से खर्च किया जा सकता है।
खास बातें
- प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट को इस संबंध में बताया
- प्रोजेक्ट को महत्वपूर्ण बताते हुए दिल्ली सरकार को फंड देने के लिए कहा