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कैंपस में गिड़गिड़ाते रहे छात्र, कोई नहीं सुनने वाला

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मेरठ। स्थान: चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी कैंपस। समय दोपहर के 2:30 बजे थे। गोपनीय विभाग की दो नंबर खिड़की पर छात्र-छात्राओं की लाइन लगी थी। कोई बीए की मार्कशीट के लिए बागपत और मुजफ्फरनगर से पहुंचा था तो कोई दिल्ली से एलएलबी की मार्कशीट लेने के लिए कतार में लगा था। घंटों से खड़े छात्र-छात्राएं बार-बार काउंटर पर आने वाले कर्मचारियों से गुहार लगा रहे थे कि फॉर्म तो जमा कर लीजिए। लेकिन मध्याह्न तीन बजे तक भी काउंटर पर छात्रों की किसी ने नहीं सुनी। थक-हारकर कई छात्र अफसरों को कोसते हुए निकल गए।
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कैंपस में मार्कशीट लेने के लिए मुसीबत झेलने वाले छात्रों की ये पीड़ा सिर्फ शुक्रवार को ही नहीं दिखी। यहां पर रोज ऐसा ही हाल रहता है। कोई दिन ऐसा नहीं बीत रहा जब लंच टाइम के बाद छात्र-छात्राओं को दोपहर 2:30 बजे के बाद तक ऐसे ही काउंटर पर खड़े रहना न पड़ता हो। सिर्फ बीए-एलएलबी वाले काउंटर का ये हाल नहीं था। बीएड काउंटर के बाहर भी लाइन लगी थी।
बीए की मार्कशीट बनवाने के लिए खुर्जा (बुलंदशहर) से आए विपिन ने बताया कि चार घंटे से परेशान घूम रहा हूं( लेकिन फार्म तक जमा नहीं हो पाया है। मुजफ्फरनगर से आए संजय ने बताया कि लंच से पहले तो काउंटर बंद था ही( लेकिन पौने तीन बजे तक भी कोई फार्म लेने वाला नहीं है। दिल्ली से एलएलबी की मार्कशीट बनवाए आए सुधाकर झा ने बताया कि यूनिवर्सिटी का नाम सुना था( आज देख लिया कि यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को हो रही है। दो छात्राओं ने बताया कि गोपनीय विभाग में कोई सुनने वाला नहीं है। मार्कशीट बनवाने वाला फार्म तक नहीं मिला।
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छात्रों को रुला रहा सिंगल विंडो सिस्टम
गोपनीय विभाग में दलाली रोकने और छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए पूर्व रजिस्ट्रार के कार्यकाल में सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में तो ये व्यवस्था ठीक चली( लेकिन बाद में सारी व्यवस्था ध्वस्त हो गई। अब छात्रों को पहले विंडो से फार्म लेकर भरना होता है। उसमें सारी जानकारी लिखने के बाद डाकघर से लिफाफा लेकर उस पर टिकट लगाने के बाद पता लिखा जाता है। फॉर्म भरकर छात्र लिफाफे में रखकर उसे कर्मचारी के पास विंडो पर जमा करा देते हैं। लेकिन हालात ये हैं कि एक-एक महीने तक भी छात्रों की मार्कशीट नहीं पहुंच रही। इसके चलते रोजाना यूनिवर्सिटी में आने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्र-छात्राएं ऐसे थे जो बुलंदशहर, खुर्जा, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत और गाजियाबाद से पहुंचे थे। छात्र-छात्राओं ने बताया कि सुबह से भटकते-भटकते ढाई बज गए हैं( लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
आधे कर्मचारियों का यही हाल
सीसीएसयू के प्रशासनिक भवन में तीन सौ के करीब कर्मचारी बैठते हैं। यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों के काम का समय सुबह दस बजे से शाम 4:30 बजे तक का है। इसमें दोपहर 1-2 बजे तक लंच टाइम है। यानी कर्मचारियों की नौकरी साढ़े पांच घंटे में ही पूरी हो जा रही है। लेकिन इतने समय भी अधिकतर काम नहीं कर रहे। वर्षों से यूनिवर्सिटी में लंच समय के नाम पर कर्मचारी दोपहर के 12:45 बजते ही कुर्सी से गायब हो जाते हैं। आधे कर्मचारियों को छोड़ दें तो करीब डेढ़ सौ कर्मचारी दोपहर 2:30 बजे से पहले सीट पर नहीं मिलते। कामचोरी इतनी है कि अगर लंच टाइम हो गया तो एक हस्ताक्षर भी डेढ़ घंटे के बाद होगा। छात्र-छात्राओं को इसके लिए भले ही घंटों इंतजार करना पड़े।
रोजाना करेंगे मॉनीटरिंग
डिप्टी रजिस्ट्रार इसकी रोजाना मॉनीटरिंग करेंगे कि कौन कर्मचारी देरी से आ रहा है। मैं खुद भी इस पर नजर रखूंगा। छात्रों की इस समस्या को जल्द ही दूर कराया जाएगा। -ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार सीसीएसयू
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खास बातें:
- मार्कशीट लेने को लगे रहे लाइन में, काउंटर पर नहीं पहुंचा कर्मचारी
- विवि में रोजाना का यही हाल, सैकड़ों किमी दूर से आने वाले छात्र हो रहे परेशान
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