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मुखबिरों की छुट्टी, जीएसटी नेटवर्क पकड़ेगा टैक्स चोर

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मेरठ। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू हो चुका है। जीएसटी के नेटवर्क में ऐसी तमाम खूबियां बताई जा रही हैं कि वह कारोबारियों की जासूसी खुद ही करेगा। इसके लिए पहले की तरह टैक्स वसूलने वाले विभागों को मुखबिरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग के सूत्रों का कहना है कि जीएसटी नेटवर्क को इस तरह तैयार किया गया है कि अव्यवहारिक लेनदेन करने वाले कारोबारी आसानी से पकड़ में आ जाएंगे।
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अभी तक टैक्स वसूली करने वाले विभाग करोड़ों रुपये मुखबिरों पर खर्च करते थे, जिनसे उन्हें यह सूचना मिलती थी कि कौन टैक्स की चोरी कर रहा है। इसके लिए प्रशासन के पास भी अलग से फंड आता है। वस्तु एवं सेवा कर विभाग के सूत्रों का कहना है कि अब मुखबिरों पर इतना मोटा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि जीएसटी नेटवर्क खुद अव्यवहारिक लेनदेन करने वालों की मुखबिरी कर देगा। सूत्रों का कहना है कि अभी तक व्यापारी जीएसटी नेटवर्क को पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं। उन्हें इसे समझने में अभी वक्त लगेगा। इसकी कुछ व्यवस्था गोपनीय है, जिनसे टैक्स चोरी करने वाला आसानी से पकड़ा जाएगा। अव्यवहारिक लेनदेन का लेखा जोखा इसके नेटवर्क में हमेशा मौजूद रहेगा। वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि अब टैक्स से जुड़े विभागों को इस नेटवर्क से सूचना मिलती रहेगी। जीएसटी में टैक्स चोरी करने का कोई रास्ता नहीं है।
कर वसूलने वाले विभागों के नाम अब जीएसटी
मेरठ। जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज विभाग का नाम बदलकर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कर दिया गया है। इसका बोर्ड भी लगा दिया गया है। वाणिज्य कर कार्यालय का नाम भी बदलकर वस्तु एवं सेवा कर हो गया है। हालांकि वहां अभी नया साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है। इसके अलावा रविवार को भी दोनों विभागों में काम हुआ। उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल 1948 को बिक्री कर विभाग की शुरुआत हुई थी। वर्ष 1994 में इसका नाम बदलकर व्यापार कर कर दिया गया। एक जनवरी 2008 को उत्तर प्रदेश में व्यापार के बदले वैट अधिनियम लागू होने के बाद इसे वाणिज्य कर नाम दिया गया। इसी तरह सेंट्रल एक्साइज एवं साल्ट अधिनियम वर्ष 1944 में लागू हुआ था। 1986 में इसे बदलकर सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट कर दिया गया। वर्ष 1996 में कुछ संशोधन के साथ सेंट्रल एक्साइज कर दिया गया, तब से अभी तक यही एक्ट प्रभारी था।
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खास बात
- टैक्स चोरी पकड़ने के लिए नहीं होगी मुखबिरों की जरूरत
- विभाग टैक्स चोरी पकड़ने के लिए खर्च करते थे करोड़ों रुपये
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