अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शाही ईदगाह पर ईद की नमाज से पहले तकरीर करते हुए कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि मुसलमानों को मोदी और योगी से डरने की जरूरत नहीं है। अगर डरना ही है तो केवल अल्लाह से डरो। देश में मुसलमानों के साथ ज्यादतियां बढ़ रही हैं। जनता पर जुल्म करने वाली हुकूमतें अधिक दिन नहीं चलती हैं। इससे पूर्व शहर काजी जैनुस साजिद्दीन ने कहा कि इस्लामी कानून में तब्दीली किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।
शाही ईदगाह पर ईद की नमाज से पहले तकरीर में कारी शफीकुर्रहमान ने हर मोड़ पर केंद्र व प्रदेश सरकार को कोसा। प्राईवेट अस्पतालों एवं स्कूलों की मनमानी का जनता की तरफ से विरोध किया। कहा कि देश में मुसलमानों के साथ आए दिन जुल्म ज्यादती हो रही है। जनता खौफ में है। ट्रेन में सवार युवक का नाम पूछकर सिर्फ इसलिए हत्या कर दी जाती है कि वह मुसलमान था। इस तरह के जुल्म से कोई भी सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि सभी नौजवान अपने को संभालें और बुराई से दूर रहें। उन्होंने निजी अस्पतालों व स्कूलों पर भी उंगली उठाते हुए कहा कि इन दोनों से आम जनता का आर्थिक शोषण आम बात है। लेकिन सरकार इस तरफ खामोश है। केंद्र व प्रदेश सरकार इस ओर तत्काल कोई कदम उठाए।
मुल्क में अमन और शांति को उठे हजारों हाथ
शाही ईदगाह पर सुबह 7:50 बजे हुई ईद की नमाज
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित शाही ईदगाह पर सुबह 7:50 बजे शहर काजी जैनुस साजिद्दीन ने ईद की दो रकआत नमाज कराई। जिसके बाद शहर काजी ने दुनिया और मुल्क में सभी की हिफाजत, खुशहाली, अमनचैन, सलामती, आपसी भाईचारा एवं कारोबार की तरक्की के लिए दुआ कराई।
शहर काजी ने मुल्क में जुल्म ज्यादती की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको बराबर का अधिकार है। देश में मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। नोएडा का अखलाक कांड इसका उदाहरण हैं। इस तरह से जिन मुसलमानों को मारा जा रहा है कि उन्हें शहीद का स्थान ही दिया जाना उचित है। कहा कि मुसलमानों के निजी मामलों में हस्तक्षेप निंदनीय है। देश में इस्लामी कानून में तब्दीली करने का प्रयास किया जा रहा है। मुसलमान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
खुतबे में ईद की अहमियत बयान
नमाज के बाद शहर काजी ने खुतबे में कहा कि नबी हजरत मोहम्मद (सल.) जब मक्का से मदीने तशरीफ लाए तो उन्होंने वहां पर देखा कि दो त्योहार नोरोज और मेहरजान के नाम से मनाने का रिवाज है, जिसमें लोग खेलकूद कर खुशी मनाते हैं। यह देखकर उन्होंने ईदुल फितर और ईदुल अजहा मनाने का हुक्म दिया। ईदुल फितर कुराने करीम नाजिल होने की खुशी में रमजान के रोजों के बाद पहली शव्वाल (इस्लामी महीना) को और ईदुल अजहा 10 जिलहिज्जा (हज के दौरान) को मनाई जाती है। शहर काजी ने अपील की कि मुसलमान कुरान के बताए रास्तों पर चलें और नेक जिंदगी गुजारें। सुन्नत पर अमल करते हुए हर बुराई से बचें। अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी दिलाएं, यही उनकी तरक्की का आसान रास्ता होगा।
खास बातें
- कारी शफीकुर्रहमान ने कहा, मुल्क में मुसलमानों के साथ हो रही ज्यादती
- शहर काजी जैनुस साजिद्दीन बोले, इस्लामी कानून में तब्दीली नहीं होगी बर्दाश्त
- शाही ईदगाह पर नमाज से पहले की गई तकरीर