विदेश तक नाम, पर सुविधाओं को मोहताज
किठौर। शाहजहांपुर-किठौर क्षेत्र में करीब 90 प्रतिशत भूमि पर आम, लीची, अमरूद एवं नाशपाती के बाग हैं। ये सब शाहजहांपुर मंडी से विदेश तक निर्यात किए जाते हैं। शाहजहांपुर मंडी से सरकार को लाखों रुपये सालाना राजस्व मिलता है। इसके बावजूद यहां के लोग सुविधाओं को तरस रहे हैं। सुरक्षा और सुविधा के नाम पर यहां के लोगों को छला जा रहा है।
यहां पर बागान का कारोबार बडे़ स्तर पर है। इनमें अधिकतर आम के बाग हैं। समय-समय पर बीमारियां जकड़ लेती हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से कृषि रक्षा की सलाह देने के लिए अधिकारी मौजूद नहीं है। यही नहीं देश-विदेश से आए व्यापारियों के लिए मंडी समिति की ओर से पेयजल, शौचालयों और ठहरने की व्यवस्था नहीं की गई है।इससे व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों के मुताबिक यह आम के कारोबार के लिए बांग्लादेश, नेपाल सहित सिलीगुड़ी, बिहार आदि राज्यों से व्यापारी आते हैं। मंडी समिति इनसे लाखों रुपये टैक्स वसूलती है।
सुरक्षा नहीं, आए दिन जाम
मेरठ-गढ़ मुख्य मार्ग पर शाहजहांपुर मंडी होने के कारण आम के सीजन में यहां कई-कई घंटे जाम लगने से यात्री परेशान रहते हैं। इतना ही नहीं इसमें एंबुलेंस फंस जाने पर मरीजों की जान पर बन आती है। इससे तीमारदारों को परेशानी होती है। यही नहीं जाम के चलते वाहन चालकों और लोगों में मारपीट तक हो जाती है। शाहजहांपुर में सेंट्रल बैंक होने के कारण व्यापारियों को किठौर आना पड़ता है। जिसके चलते कई बार घटना हो चुकी है। जिसके चलते पिछले साल शाहजहांपुर में पुलिस चौकी स्थापित की गई थी।
मंडी समिति का अधिकारी तैनात
शाहजहांपुर से हर सालाना राजस्व विभाग और मंडी समिति को लाखों रुपये मिलते हैं। वहां पर मंडी समिति का कोई अधिकारी स्थायी रूप से तैनात नहीं है। यही नहीं उनका आफिस तक नहीं है। शाहजहांपुर के आढ़ती और व्यापारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मंडी समिति का एक अधिकारी शाहजहांपुर में तैनात किया गया है। वह सप्ताह में एक-दो बार मंडी में आता है। वह पूरे सप्ताह का अंदाज से ही माल चढ़ाकर टैक्स वसूल लेता है। कई बार शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
नहीं कोई ट्रांसपोर्ट
मंडी से आम के सीजन में रोजाना सैकड़ों गाड़ियां राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड आदि समेत देश भर में रोजाना जाती हैं। इसके बावजूद यहां पर एक भी ट्रांसपोर्ट कंपनी नहीं है। जिसके लिए व्यापारियों को मेरठ, गाजियाबाद, लोनी, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गजरौला आदि से गाड़ियां मंगानी पड़ती हैं। इसके लिए लोकल एजेंट को हजारों रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं।