शांतिनाथ विधान से असाध्य रोग हो जाते हैं दूर
हस्तिनापुर। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान के 14वें दिन आज 105 परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं की गईं।
कार्यक्रम की शुरूआत सर्वप्रथम मुख्य वेदी के अभिषेक से हुई सभी भक्तों ने जिनेन्द्र भगवान का मंत्रोच्चार पूर्वक जलाभिषेक किया गया। शांतिधारा करने एवं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुनील जैन, पूनम जैन, पुलकित जैन, कुमाआचल जैन को मिला। सभी विधान के आयोजकों का तीर्थ क्षेत्र कमेटी विधान संयोजक प्रद्युम्न कुमार जैन सभी का मंगल तिलक व माला पहनाकर सम्मान किया। नित्य नियम पूजन के क्षेत्र पर विराजमान मुनि भावभूषण जी महाराज श्रावकों के मध्य प्रवचन करते हुए कहा कि इस शांतिनाथ विधान को करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। आगम में वर्णन है कि जलोदर रोग के कारण जो व्यक्ति पेट के भार से खेद खिन्न है। ऐसे भयानक रोग के कारण जिनकी दशा सोचनीय है। जिनके जीवित रहने की आशा नहीं रही। ऐसे रोगी जन यदि जिनेंद्र भगवान की धूल अपने शरीर से लगाते हैं तो वे भी निरोग होकर कामदेव के समान सुंदर हो जाते हैं। साथ ही उन्हें किसी का भय भी नहीं सताता। जिनेंद्र भगवान के इस स्तवन को जो पढ़ता है। उसके मदोन्मत्त हाथी, सिंह, दावानल (प्रचण्ड अग्नि) सर्प, युद्ध, समुद्र, जलोदर आदि रोग तत्काल नष्ट हो जाते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसके पुरस्कार सतेंद्र जैन, हेमलता जैन द्वारा प्रदत्त किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष सतेंद्र कुमार, शशांक जैन, विजय कुमार, अतुल जैन, अनिल कुमार, वीरेंद्र जैन, मोतीलाल जैन, कुणाल जैन, मंत्री प्रद्युमन कुमार, मुकेश जैन, अशोक कुमार उपप्रबंधक, मणिचंद जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा है।