तेजी से घट रहा है भूजल स्तर, खतरे में पीढ़ी का भविष्य
खरखौदा। घरेलू सबमर्सिबल व फसलों की सिंचाई के प्रयोग में होने वाले ट्यूबवेलों द्वारा अंधाधुंध जल दोहन के कारण खरखौदा क्षेत्र का भूजल स्तर तेजी से घट रहा है। यदि जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ी को आसानी से पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
खरखौदा क्षेत्र में कृषि भूमि पर सिंचाई नलकूप व मानसून पर ही आधारित है। क्षेत्र में अधिकतर सब्जी की पैदावार होती है। जिस कारण सिंचाई की भी अधिक आवश्यकता होती है। लेकिन क्षेत्र में खेती की सिंचाई के लिए नहर या नदी नहीं होने के कारण कृषि पूरी तरह से नलकूप पर ही आधारित है। खरखौदा ब्लॉक पहले ही भूजल विभाग से डार्क जोन में घोषित था। जिस कारण भूजल विभाग द्वारा खरखौदा ब्लॉक में नलकूपों के बोरिंग पर रोक थी और न ही विद्युत निगम द्वारा नलकूप के कनेक्शनों पर रोक थी। लेकिन प्रदेश में जैसे ही भाजपा की सरकार आई तो क्षेत्र के किसानों ने प्रदेश सरकार से मांग की तथा नलकूप के लिए नए कनेक्शन खोल दिए। खंड विकास कार्यालय पर भूजल विभाग द्वारा लगाए गए पीजोमीटर से मिले आंकडों के अनुसार तीन वर्ष पहले खरखौदा क्षेत्र का भूजल स्तर 18.78 मीटर पर था लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा खोले गए विद्युत कनेक्शन के बाद अब हालात बिगड़ गए हैं। भूजल विभाग के अनुसार इस समय खरखौदा क्षेत्र अति दोहन क्षेत्र में आ रहा है।
अतिदोहित क्षेत्र घोषित
भूजल विभाग के अनुसार किसी भी क्षेत्र के जल स्तर की घोषणा रिचार्ज व दोहन के अनुपात को रखकर की जाती है। यदि किसी क्षेत्र में भूजल का दोहन 75 प्रतिशत तक है तो वह पूर्ण रुप से सुरक्षित है। यदि दोहन रिचार्ज का 90 प्रतिशत तक होता है तो उसे डार्क जोन में घोषित किया जाता है। लेकिन यदि दोहन रिचार्ज का 100 प्रतिशत से अधिक होता है तो उसे अति दोहन जोन में रखा जाता है।