फलावदा। गांव दांदूपुर शिव मंदिर के प्रांगण में चल रहे पांच महाकुंडीय चतुर्वेद परायण महायज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को पहुंचे ब्रह्माचारी संन्यासी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज एवं महायज्ञ के ब्रह्मा गुरुवचन शास्त्री ने आहुति देकर आरंभ कराया।
शिव मंदिर प्रांगण में बनाए महायज्ञ के लिए पांच बड़े महाकुंडों में एक साथ यजमानों ने श्रद्धालुओं के साथ आहुति देकर चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के तीसरे दिन यज्ञ के ब्रह्मा गुरुवचन शास्त्री ने कहा कि यज्ञ करने से संसार के प्राणियों में फैल रही कुरीतियों का विनाश कर बुद्धि का शुद्धिकरण होता है। प्राणी आज जीव-जंतुओं की हत्या कर उनका मीट खा रहा है। इसी वजह से प्राणी ने राक्षस का रूप धारण कर लिया है। जिस कारण प्राणी शैतान बनकर घोर कृत्य कर रहा है। प्राणी को चाहिए कि वह जीव-जंतुओं का मीट, शराब आदि का सेवन न करें और हमेशा शुद्ध शाहकारी भोजन का सेवन करें। वहीं, प्राचीन संस्कृति का अनुसरण करें। आत्मिक, शारीरिक व आध्यात्मिक उन्नति होगी। यज्ञ करने से ही देव पूजा दानकर प्राणियों का जीवन अति उत्तम होगा तथा अनगिनत सभी प्रकार के लाभ होंगे। कार्यक्रम के भजनों उपदेशक पंडित योगेशदत्त शर्मा ने भजनों के माध्यम से समाज में फैल रही कुरीतियों पर प्रकाश डालते हुए यज्ञ करने का प्राणी के जीवन में विशेष महत्व बताया। ग्रामीणों ने बताया यज्ञ में ढाई क्विंटल सामग्री तथा छह क्विंटल देसी घी इस्तेमाल हो रहा है। कार्यक्रम में भारतवीर, अनुज, विक्रम प्रधान, तेज सिंह पोसवाल, गुरुशरण प्रधानाचार्य, शिवकुमार, भगत प्रताप, डॉ. मनमोहन सिंह, दीप सिंह सैनी, रोहित कोरी, दीपक कुमार, मुकेश आदि लोग शामिल थे।
मुख्य बातें
दांदूपुर शिव मंदिर के प्रांगण में चल रहे पांच महाकुंडीय चतुर्वेद परायण महायज्ञ