फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तृप्त पितर करते है कुटुंब का कल्याण

विज्ञापन
विज्ञापन
मवाना। श्राद्ध शब्द में श्रत अर्थात सत्य और धा यानी धारण करना शामिल है। श्राद्ध का सरलतम अर्थ सत्य को धारण करना है। वहीं, जीवन का सबसे बड़ा सत्य यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे है। फलावदा रोड स्थित शिव सरस्वती मंदिर के पुजारी पंडित मोहन जोशी ने बताया कि तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार मिट्टी से निर्मित शरीर विविध तत्वों का मृत्यु उपरांत ब्रह्मांड में विलय हो जाता है, पर मोह के धागे नहीं छूटते हैं। मरणोपरांत भी आत्मा में मोह माया का अतिरेक होता है। यह प्रेम ही उन्हें पितृ पक्ष में धरती पर वंशजों के पास खींचता है। ऐसी मान्यता है कि अश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिनों में (प्रतिपदा से लेकर अमावस्या) तक यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं। समस्त पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए वंशजों के समीप आते हैं। जिससे उन्हें आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। 9 अक्तूबर तक पितृ पक्ष रहेगा, जिसमें कोई मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
विज्ञापन

मनुष्य पर होते हैं तीनाण
पंडित मोहन जोशी के अनुसार पितर का अर्थ पितृ या श्रेष्ठ जन होता है। बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार पुत्र वह है जो न किए गए कार्यों से अपने पिता की रक्षा करता है। पुत्र का अर्थ पूरा करना है और त्र का अर्थ रक्षा करना है। इसलिए पुत्र या पुत्री, जिसे वृहद अर्थों में समझे तो प्रत्येक मनुष्य पर तीनाण होते हैं। (पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण) मनुष्य लोक में पिता मृत्यु के समय अपना सब कुछ पुत्र या पुत्री को सौंप देते हैं। इसलिए संतान पर पितृाण होता है। हम सभी को श्राद्ध पक्ष एक अवसर देता है कि हम अपने पितरों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकें।
जीवन की शुरुआत का प्रतीक है पिंडदान
पंडित मोहन जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों का पिंडदान किया जाता है। पिंड एक प्रतीक है जीवन की शुरुआत का। पिंड का अर्थ शरीर है जिसमें समग्र ब्रह्मांड की छवि आलोकित है। इसका अर्थ है कि तुम में वह ब्रह्मा आलोकित है।
विज्ञापन

जल में अन्न के तर्पण का होता है विशेष महत्व
श्राद्ध पक्ष में जल और अन्न में तर्पण करना चाहिए। वस्तुत: पितर सूक्ष्म शरीर है। अर्थात ब्रह्मा की ज्योति है पर अभी मुक्त नहीं हुए हैं। उनका प्राण प्रिय में यानी वंशजों में उलझा हुआ है। श्राद्ध पक्ष में जल का अर्घ्य दिया जाता है, जल से ही विश्व जन्म लेता है। उसके द्वारा सिंचित होता है और फिर उसी में लीन हो जाता है। जब पितरों को जल और अन्न द्वारा तर्पण किया जाता है तब उनकी आत्मा तृप्त होती हैं और कुटुंब कल्याण पथ पर जाता है।
विज्ञापन

कौआ, कुत्तों व गाय का भोजन निकाले
पंडित मोहन जोशी ने बताया कि श्राद्ध में कौआ, कुत्तों व गाय का भोजन निकालना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में इन्हें भोजन खिलाना शुभ माना जाता है।
मुख्य बातें
श्राद्ध करने से कल्याण पथ पर जाता है कुटुंब
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें