हस्तिनापुर। खादर में उफन रही गंगा अब क्षेत्र के लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। इसमें गांव लतीफपुर निवासी सरदार बाबू बामनौली के जंगल में गहरे पानी में डूब गया। उसे बमुश्किल बाहर निकाला तथा चिकित्सकों को दिखाया। उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया।
खादर क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में निरंतर हो रहे उतार-चढ़ाव से ग्रामीण परेशान हैं। उन्हें पशुओं के लिए जान जोखिम में डालकर चारा लाना पड़ रहा है। ग्राम लतीफपुर निवासी सरदार बाबू (22) पुत्र अतर सिंह पशुओं के लिए चारा लेने लतीफपुर बामनौली के जंगल में गया। उसका पैर अचानक गहरे पानी में चला गया। जिससे वह डूब गया। ग्रामीण जरनैल सिंह, अलील, बबे, मोलू, राजविंद्र आदि ने उसे डूबते देख शोर मचाया एवं कुछ ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की। उसे पानी से बाहर निकाला जा सका। उसे तुरंत हस्तिनापुर में चिकित्सक के यहां ले गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया। सरदार बाबू की दो वर्ष पूर्व शादी हुई थी। उसके आठ माह की पुत्री है। इस हादसे से गांव में शोक छा गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। घर में वह अकेला कमाने वाला था।
खादर क्षेत्र में गांव फतेहपुर प्रेम के पास टूटे तटबंध से पानी क्षेत्र में फैल रहा है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पशुओं के लिए चारा लाना पड़ रहा है। विधायक दिनेश खटीक एवं उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव, तहसीलदार, सीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश भास्कर एवं ग्राम प्रधान मृतक के घर पहुंचे एवं परिजनों को सांत्वना दी। वहीं, शीघ्र आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। विधायक दिनेश खटीक ने कहा कि निर्धन व्यक्ति की मृत्यु हुई है। इसलिए वह 50 हजार रुपए की मदद करेंगे। वहीं, प्रदेश सरकार से मृतक के परिजनों का पांच लाख रुपये की मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। विधायक के साथ भाजपा कार्यकर्ता सोमनाथ पपनेजा, राजीव चौधरी, बॉबी, अमित पाइक, सुधीर चौधरी, श्यामल राय, रवि आदि रहे। मृतक के घर पर जानकारी प्राप्त करने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल जितेंद्र वर्मा, सर्वेश त्यागी, सचिन, ईश्वर चंद, गोरीशंकर, धर्मवीर, सुरेश आदि रहे।
मुख्य बातें
ग्राम लतीफपुर निवासी किसान बामनौली के जंगल में चारा लेने गया था
विधायक ने पीड़ित परिजनों को मदद दिलाने का दिया आश्वासन
खादर में बाढ़ से अधिकतर फसलें नष्ट
हस्तिनापुर। गंगा के जलस्तर की स्थिति पिछले तीन दिन से यथावत बनी हुई है। जिसे देखकर खादर क्षेत्र के लोगों में भय है कि आखिर कब तक वे इस बाढ़ की ऐसी विभीषिका को झेलते रहेंगे। किसानों की अधिकांश फसलें तबाह हो चुकी हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा रहा है। उनका कहना है कि इस बाढ़ का दंश वे कब तक झेलते रहेंगे।
बिजनौर बैराज के अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि गंगा के जलस्तर की स्थिति जस की तस बनी हुई है। आज भी बैराज से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज चल रहा है। हालांकि हरिद्वार से एक लाख 15 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज है। जलस्तर ने खादर क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। जिधर देखो उधर पानी ही पानी दिखाई देता है। दो दर्जन से अधिक गांवों के संपर्क मार्ग पानी में डूबे हैं। वहीं, जंगल में खड़ी फसलें काफी दिन से पानी भरे रहने से नष्ट हो गई है। खेतों में जलकुंभी उगने लगी है। लोगों का कहना है कि इस तबाही से उन्हें कब निजात मिलेगी। पिछले सात दशकों से प्रत्येक वर्ष गंगा की बाढ़ का दंश झेलते आ रहे हैं। क्षेत्र के फतेहपुर प्रेम, सिरजेपुर, रठौरा कलां, दबखेड़ी, भागोपुर, हंसापुर परसापुर, भीकुंड, कुन्हैड़ा, हादीपुर गांवड़ी, किशनपुर, खेड़ी कलां, बधुवा, दूधली खादर, बस्तौरा, मखदूमपुर आदि गांवों के जंगलों में पानी लबालब भरा है। पानी भरा होने से धान की फसल तो नष्ट हो चुकी है जबकि गन्ने की फसल भी पत्तियां भी ऊपर से सूखने लगी हैं। यदि जल्द ही गन्ने की फसल से पानी कम नहीं हुआ तो यह फसल भी पूर्ण रूप से नष्ट हो जाएगी। लतीफपुर गांव के आसपास भी बाढ़ का पानी आ रहा है। वहां ग्रामीणों ने खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की मदद की बात भी विधायक से की। उन्होंने कहा कि वे मंडलायुक्त मेरठ के साथ यहां खादर क्षेत्र में बाढ़ का दौरा करने आएंगे व स्थिति देखकर बाढ़ पीड़ितों की मदद का प्रयास करेंगे। एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि पानी के जलस्तर पर पूरी नजर रखी जा रही है। क्षेत्र में लोगों के आने-जाने के लिए पर्याप्त नाव मुहैया करा दी गई हैं। जिससे लोग आ जा रहे हैं।