उपजिलाधिकारी ने हस्तिनापुर रोड स्थित मंदिर की भूमि में फैक्ट्री लगाने के मामले में चल रहे विवाद में रविवार को दोनों पक्षों को बुलाकर दो दिन में कब्जा हटाने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि हस्तिनापुर रोड पर बामनी वाला मंदिर स्थित है। जिसमें काफी भूमि है। इस भूमि पर अपने आपको इस मंदिर की कमेटी का सदस्य बताने वाले लोगों ने टाइल्स फैक्ट्री लगाने के लिए किराए पर दे दी थी। जिसके लिए मंदिर की जमीन पर दीवार कराकर शेड आदि डाल दिए थे। वहीं, इस मंदिर में पूजा करने तथा अपने आपको महंत बताने वाले सुनीत रस्तोगी ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों से एक माह पूर्व की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
सुनीत रस्तोगी ने इस मामले को लेकर विहिप की शरण में पहुंचे। लगभग दो सप्ताह पूर्व यहां पर विहिप के सुदर्शन चक्र महाराज ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव को फरवरी में उक्त अवैध टाइल्स फैक्ट्री को मंदिर परिसर से हटाने की मांग की थी। ऐसा नहीं किए जाने पर स्वयं कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उसे हटाने की चेतावनी दी थी। वहीं, उन्होंने प्रेसवार्ता में यह भी कहा था कि चाहे सत्ताधारी पार्टी के लोगों ने ही यह कार्य क्यों न किया हो, वे मंदिर की भूमि पर ऐसा नहीं होने देंगे। आज रविवार की सुबह उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने अपने कार्यालय में तथाकथित कमेटी के पदाधिकारी तथा महंत बताने वाले सुनीत रस्तोगी और फैक्ट्री के लिए जमीन को किराए पर लेने वाले व्यक्ति को बुलाकर साफ किया कि उक्त भूमि सरकारी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि कोई कमेटी अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने दोनों पक्षों के लोगों को दो दिन में उक्त मंदिर जमीन से कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दोनों पक्षों से हस्ताक्षर भी कराए हैं। एसडीएम और सीओ यूएन मिश्र पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे तथा कराए निर्माण को देखा तथा थाना प्रभारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
सीएम दरबार में प्रकरण पहुंचा तो जागे अफसर
बीते दो माह से उक्त मंदिर प्रकरण चल रहा था। पुलिस और प्रशासन इसमें कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा था। चर्चा थी कि इसमें कुछ सत्ताधारी पार्टी के लोगों के दबाव चलते पुलिस प्रशासन मौन साधे थे। चर्चा है कि अब यह मामला सीएम के दरबार में पहुंच गया है। वहां से मिले आदेश के बाद अधिकारी मंदिर से अवैध कब्जा हटवाने में मुस्तैदी से लग गए हैं।
किराए पर दी थी जमीन
श्री शिव मंदिर बाग बामनी वाला तथा श्री सखराय देवी मंदिर कमेटी के मंत्री सुरेंद्र चौहान से इस बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि उक्त भूमि सरकारी नहीं है। यह जमीन दान में दी गई थी। उन्होंने नियमानुसार इसको किराए पर दिया है। जिसको किराए पर दिया था उसने उन पर मुकदमा कर दिया है। इसलिए वे इसको अपने हाथों से नहीं हटाएंगे। उन्होंने यह बात एसडीएम को बता दी है। साथ ही बताया कि कमेटी के रजिस्ट्रेशन के संबंध में आदेश भी एसडीएम को दिया है।