दूषित खानपान से डायरिया का वार, सबसे ज्यादा बच्चे शिकार
- 14 माह में मिले 35 हजार 498 मरीज, पांच साल तक के बच्चे सबसे ज्यादा
- स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
- भारत सरकार केइंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म पोर्टल पर भी दी गई सूचना
अरीश रिज़वी
मेरठ। डायरिया मेरठवासियों को परेशान कर रहा है। यह मुख्यत: दूषित पानी और खाने से होने वाली बीमारी है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 14 माह (जनवरी 2018 से लेकर फरवरी 2019 तक) की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 35 हजार 498 मरीजों को डायरिया निकला है। इनमें तीस फीसदी मरीज सिर्फ बच्चे हैं, इनमें सबसे अधिक पांच साल तक के बच्चे हैं। बच्चों के बाद डायरिया की चपेट में आने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा है।
यह मरीज जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर पर आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने भारत सरकार के इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म पोर्टल पर भी यह जानकारी अपडेट की है। डायरिया में दिनभर में तीन या उससे अधिक बार पानी की तरह पतले दस्त होते हैं। इसके अलावा कई बार बुखार और उल्टी भी होती है। ऐसे में शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी (खासकर बच्चों में) होने के साथ ही अत्यधिक कमजोरी भी हो जाती है।
दूषित खाना और पानी बढ़ा रहा है गेस्ट्रोएन्टेराइटिस (आंत्रशोथ) की भी बीमारी
दूषित खाना और पानी गेस्ट्रोएन्टराइटिस (आंत्रशोथ) की बीमारी भी बढ़ा रहा है। इससे मरीज के पेट में दर्द, मरोड़ के साथ लूज मोशन होने लगते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या होती है प्यास तेज लगती है, लेकिन पानी पीने पर उल्टी होने लगती है।
दो तरह का होता है डायरिया
डायरिया दो तरह का होता है। एक्यूट और क्रॉनिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु विषाणु या पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब बीमारी हफ्ते भर से ज्यादा रह जाए तो उसे क्रॉनिक कहा जाता है। क्रॉनिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इसमें पाचन तंत्र की गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है।
बच्चों में ज्यादा डायरिया होने की वजह
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उमंग अरोड़ा का कहना है कि बच्चे हाथ धोने पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। बच्चों में हाथ धोने की आदत डालने की जरूरत होती है। एंटी बैक्टीरियल साबुन इस्तेमाल करें। साबुन में झाग उठाकर कम से कम 20 से 30 सेकेंड तक बच्चे का हाथ धोएं। हाथ धोने के बाद साफ और सूखे तौलिये से हाथ पोंछना भी न भूलें।
बच्चों-किशोरों में निशुल्क लगाया जाएगा रोटा वायरस का टीका
डायरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान में रोटा वायरस की वैक्सीन को भी शामिल किया है। यह वैक्सीन बच्चों और 16 साल तक के किशोरों को लगाई जा रही है। साथ ही लोगों को दूषित खानपान के प्रति जागरूक कराया जा रहा है। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
यह निकले कारण
- खाने-पीने की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या खराब होना
- स्तनपान के दौरान साफ सफाई नहीं होना बच्चों में डायरिया होने की बड़ी वजह है।
- बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैक्ड फूड का इस्तेमाल
- कटे हुए और खुले में रखे फल खाना
- एसी, कूलर वाले कमरे में से सीधे धूप में निकलना
- रोटा वायरस का संक्रमण होना
- धूप से लौटकर आते ही तत्काल पानी पीना
- बच्चों में मिलावटी दूध से
- पाचनशक्ति कमजोर होना, शरीर में पानी की कमी होना
ऐसे करें बचाव
- साफ पानी पीना चाहिए।
- डायरिया में बच्चों को उबला हुआ पानी देना ज्यादा फायदेमंद है।
- बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैक्ड फूड के इस्तेमाल से बचें।
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- शौच के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथ धोएं।
- पेट में दर्द की समस्या हो तो बिना देर करे चिकित्सक से सलाह लें।
- समय-समय पर ओआरएस घोल पीते रहें। नीबू पानी पिएं।