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सड़क पर अतिक्रमण, खामोश है सिस्टम

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मेरठ। शहर की सड़कों पर अतिक्रमण के आगे पूरा सिस्टम खामोश बना हुआ है। चाहे मुख्य चौराहे हों या फिर अन्य मार्ग। अधिकांश स्थानों पर तो सड़कों पर खिंची सफेद पट्टी तक सामान रखकर कब्जा कर लिया गया है। थानों की पुलिस तो यहां कोई कार्रवाई करती नहीं। ट्रैफिक पुलिस भी सप्ताह में एक या दो दिन अभियान के नाम पर खानापूर्ति ही करती है। यह अतिक्रमण जाम का भी बड़ा कारण बनता है।
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सड़कें अतिक्रमण मुक्त होने के साथ ही स्वच्छ हों तो उस शहर की सूरत अपने आप बदल जाती है। प्रदेश में जब सत्ता बदली तो अतिक्रमण के खिलाफ दो महीने तक पूरे शहर में अभियान चलाया गया। खुद एसएसपी को भी फोर्स लेकर सड़कों पर उतरना पड़ा। नतीजा यह रहा कि शहर की तंग कही जाने वाली सड़कें चौड़ी दिखने लगीं और जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो गई। लेकिन उसके बाद पुलिस का यह अभियान धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया और शहर की सड़कें फिर से अतिक्रमण की चपेट में आ गईं।
अब सड़कों का यह हाल
- जीरो माइल चौराहे से लेकर बेगमपुल तक बुरा हाल है। सड़क पर ही अवैध ठेले, फड़ लगा ली गई। अवैध तरीके से ऑटो और ई-रिक्शा भी सड़कों को घेरे रखते हैं, जिससे यहां जाम की समस्या रहती है।
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- जीरो माइल से लेकर लालकुर्ती मुख्य मार्ग का भी यही हाल है। सड़क के दोनों तरफ का काफी हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है।
- बेगमपुल से दिल्ली रोड पर भैसाली बस अड्डा, केसरगंज, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा, दिल्ली चुंगी, बागपत रोड पर भी सड़क पर अवैध तरीके से अतिक्रमण के चलते जाम लगता है।
- बेगमपुल से बच्चा पार्क तक सड़क के दोनों तरफ अवैध तरीके से कब्जा है।
- हापुड़ अड्डा चौराहा पर आधे से ज्यादा सड़क ऑटो और ई-रिक्शा वाले घेरे रखते हैं। रही-सही कसर ठेले वाले और दुकानदार पूरी कर देते हैं। इनका सामान दुकानों से काफी आगे तक रहता है। वहीं, चौराहे का एक हिस्सा निजी बसों के हवाले रहता है। इसी तरह गढ़ रोड और हापुड़ रोड का भी यही हाल है।
तेजगढ़ी चौराहे से लें सबक
शहर में तेजगढ़ी चौराहा ही फिलहाल ऐसा चौराहा है, जहां अभी जाम से राहत है, क्योंकि चौराहे के अगल-बगल कहीं भी स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण नहीं है। यहां ट्रैफिक नियमों का भी पालन होता है। सवाल यह है कि जब इस चौराहे पर व्यवस्था बन सकती है तो शहर के दूसरे चौराहों पर क्यों नहीं।
पुलिस को नहीं दिखता अतिक्रमण
शासन के निर्देश हैं कि अतिक्रमण के खिलाफ ट्रैफिक और थाना पुलिस मिलकर काम करें। लेकिन शहर के थानेदार हो या चौकी इंचार्ज या फिर फैंटम पुलिस, इन्हें गश्त के दौरान कहीं भी अतिक्रमण नहीं दिखता। कहीं जाम दिखता है तो जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की मानकर मुंह मोड़ लेते हैं। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर कहीं पार्किंग नहीं है। सड़क पर ही अवैध तरीके से वाहन खड़े होते हैं, जिनसे जाम लगता है।
केवल कुछ घंटे की सख्ती
पुलिस शहर में जब भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है तो कुछ घंटों तक ही सख्ती रहती है। उसके बाद फिर से सड़कों पर अतिक्रमण हो जाता है। ट्रैफिक पुलिस भी अभी तक कोई ठोस प्लान नहीं बना पाई है।
नहीं होने देंगे अतिक्रमण
एसपी सिटी मान सिंह चौहान का कहना है कि पुलिस समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है। कुछ स्थानों पर यदि अतिक्रमण है और सड़क तक कब्जा कर लिया गया है तो ट्रैफिक पुलिस से भी इसमें बात की जाएगी। अतिक्रमण किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।
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खास बातें:
शहर की सड़कों पर सफेद पट्टी तक हो गया कब्जा
कोई ऐसा चौराहा नहीं, जो अतिक्रमण की चपेट में न हो
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