बीते नौ वर्षों से क्षेत्रीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के चलते खादर क्षेत्र के भीकुंड ग्राम के निकट गंगा पर बन रहे पुल का निर्माण बजट के अभाव में कभी भी बंद हो जाता है। इसके चलते लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगोें को जान जोखिम मे डालकर नाव के सहारे गंगा पार करके हर रोज खेती और मजदूरी के लिए जाना पड़ता है। गंगा किनारे बसे कई गांवों के परिवारों की गुजर बसर इसी तरह चल रही है। मवाना तहसील का बड़ा भूभाग गंगा के पार आता है। इसमें क्षेत्र के किसान और मजदूर कार्य करने जाते हैं। पुल के निर्माण की उम्मीद अब धूमिल पड़ती जा रही है। यहां वर्ष 2008 में मनोहरपुर एवं भीकुंड के समीप गंगा पर पुल का निर्माण शुरू हुआ था। सरकारी उपेक्षा के चलते यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इससे क्षेत्रवासी परेशान हैं। उन्हें जान जोखिम में डालकर गन्ना एवं अन्य फसलों को बुग्गी, टैक्टर-ट्राली आदि नाव में लादकर लानी पड़ती है तीन वर्ष पूर्व नाव में सवार एक युवती गंगा में डूब गई थी। हाल ही में खेड़ी कलां के सामने नदी किनारे रखी दो नावें बह गई थीं। सरकार के प्रतिनिधि ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों को पुल निर्माण शुरू कराने का आश्वासन तो देते हैं परंतु उम्मीद पर खरे नहीं उतरते हैं। पुल बनने के बाद खादर के लोगों को आए दिन हो रहे हादसों से छुटकारा मिल सकता है। खादरवासियों की मांग पर बसपा सरकार द्वारा 22 नवंबर 2008 को आधारशिला रखकर पुल निर्माण प्रारंभ कराया गया था। राज्य सेतु निगम गंगा पुल परियोजना द्वारा तीन वर्षों तक 29 कुओं में से 26 का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था। कुछ बीम बनकर तैयार हो गए थे परंतु अब बजट के अभाव में कार्य बंद पड़ा है। खेड़ी कलां निवासी दया, रूपचंद, कालूराम आदि का कहना है कि गंगा पर पुल बन जाने से मनोहरपुर, खेड़ी समेत कई गांवों के किसानों को खेती करने में आसानी हो जाएगी। उनका कहना है कि बंद पडे़ काम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वहीं, बिजनौर जनपद के 50 गांवों के अतिरिक्त मवाना और चांदपुर आदि भी मेरठ से जुड़ जाएंगे। उधर, क्षेत्रीय विधायक दिनेश खटीक ने भी पुल के निर्माण शीघ्र शुरू कराने का आश्वासन दिया। वहीं, यह पुल वर्ष 2010 तक पूरा होकर यातायात प्रारंभ किया जाना था। पुल निर्माण कार्य प्रारंभ होते ही क्षेत्रवासियों में हर्ष की लहर दौड़ गई थीं। चार दशकों से खादर क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं पुल बनने से बाढ़ के कहर से छुटकारा मिल सकता है। भीकुंड निवासी अनूप सिंह, नीरज, दयाराम आदि ने बताया कि पुल बनने से फसलों की पैदावार बढ़ जाएगी। इस पुल के दोनों ओर दो वर्ष पूर्व सड़क बनाने के लिए मिट्टी डालने का काम शुरू किया गया था परंतु वह भी पूरा नहीं हो सका है।
मुख्य बातें
दर्जनों गांवों के लोग नाव से गंगा पाकर करके जाते हैं खेती और मजदूरी करने