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ागवत कथा का समापन।

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हस्तिनापुर।
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न्यू ब्लॉक कॉलोनी में श्री नित्यानंद जी के प्रेरणा स्रोत श्री रूपानंद जी महाराज के सानिध्य में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण के 108 विवाह, सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित मुक्ति आदि लीलाओं के मंचन और हरिनाम महिमा का विशेष वर्णन किया गया।
सोमवार को ज्ञान यज्ञ कथा की शुरूआत भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर की गई। महायज्ञ के मध्य आयोजित धर्मसभा में नीलांशुदास जी महाराज श्रीधाम वृंदावन ने कहा कि धन से अधिक धर्म को, भोग से अधिक योग को तथा साधना, आराधना और उपासना के क्षेत्र में भगवत प्रेम को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। यह भारतभूमि ज्ञान भूमि है, जहां के आप्तकाम, पूर्वकाम, परम निष्काम, अमलात्मा, शुद्धात्मा, महात्मा, महामनिषियों ने अपने भागवत प्रेम, समन्वित तत्वज्ञान से संपूर्ण संसार का मार्गदर्शन, पथ-प्रदर्शन एवं दिशा-निर्देशन किया है। इतना ही नहीं यह वह धर्मभूमि और कर्मभूमि है जहां भागवत प्रेममय धर्म तथा भागवत प्रेममय कर्म रक्षा के लिए अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक, परात्पर, परमात्मा सर्वात्मा, विश्वात्मा स्वयं विविध रूप धारण कर इस भागवत प्रेम के पथ को प्रशस्त करने के लिए उपस्थित होता है। यहां अमित, राहुल, डा. स्वदेश शर्मा, नारायण मंडल, अचिंतों ढाली, प्रदीप, तरुण सरकार, किशन गाइन, सुरजीत विश्वास, निकांत बाला, नारायण नियोगी असीम आदि का सहयोग रहा।
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किसानों के लिए फायदेमंद है गेंदे के फूलों की खेती
आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में भी इस्तेमाल
हस्तिनापुर।
देश के बडे़ और छोटे शहरों समेत कस्बों में भी गेंदे के फूलों की भारी मांग है। इसके चलते किसान इसकी व्यावसायिक खेती अपनाकर अच्छी आमदनी ले सकते हैं। गेंदे के फूलों से अनेक स्थानों पर सजावट की जाती है। इनसे बनी माला, गुलदस्ते सुंदर एवं मनमोहक होते हैं। सजावट के अतिरिक्त इनका आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल किया जाता है। गेंदे के फूलों की मालाओं का वर्ष भर उपयोग होने से इनकी भारी मांग है। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी वैज्ञानिक डा. वीरेंद्र किसानों को अन्य फसलों के साथ गेंदे के फूलों की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
इस क्षेत्र के आसपास देश की राजधानी दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा शहर हैं। यहां गेंदे के फूलों की भारी मांग है। इनकी खेती रिक्त स्थानों के अतिरिक्त मेड़, नालियों एवं सड़क किनारों पर लगाकर इनसे आय प्राप्त की जा सकती है। वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि आलू अथवा अन्य सब्जियों के खेत के बीच-बीच में गेंदे के पौधे लगाने से हानिकारक सूत्रकृमि प्रभावित नहीं होते हैं। गेंदे के फूलों की सरलतापूर्वक खेती की जा सकती है।
डा. वीरेंद्र सिंह ने किसानों को सलाह दी कि गेंदे की अच्छी पैदावार लेने के लिए उन्नत प्रजाति जैट डबल, अफ्रीकन औरेंज, बटर स्कोच उगाई जा सकती है। गेंदे की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर मात्र 250 से 400 ग्राम बीज पर्याप्त है। इसकी पौध तैयार होने के बाद अप्रैल से सितंबर तक बुवाई का सर्वोत्तम समय है। पौध रोपाई तीन से चार पत्ती होने पर 30 से 40 सेमी की दूरी पर रोपाई करनी चाहिए। अच्छी फसल के लिए नत्रजन 400 किग्रा फास्फोरस 200 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। गर्मियों में 4 से 5 दिन बाद और सर्दियों में 8 से 10 दिन के अंतर से सिंचाई आवश्यक है। समय से खरपतवार साफ करें। गेंदे की फसल पर 70 दिन बाद फूल आने प्रारंभ हो जाते हैं। ये 45 से 60 दिन तक चलते हैं। प्रति एकड़ आठ से दस टन उपज प्राप्त हो जाती है। उन्होंने इस फसल में लगने वाले रोग एवं कीटों से बचाव के उपाय बताए।
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खोखे हटाए जाने के खिलाफ शिकायत की
हस्तिनापुर। स्वामी कल्याण देव डिग्री कॉलेज एवं कृषि विज्ञान केंद्र की दीवार के निकट मीट एवं लोहे वालों के खोखे हटाए जाने का कार्य नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी निषाद मधुरमय ने पुलिस प्रशासन के साथ किया था। इससे परेशान व्यापारियों ने क्षेत्रीय नेताओं के समक्ष अपनी समस्या रखीं। भाजपा के क्षेत्रीय संयोजक सेवा सहयोगी डा. रवि प्रकाश, गौरव गुर्जर, दर्शन भारद्वाज एवं बालमुकंद बत्रा आदि पहुंचे। वहां मौजूद दुकानदारों महेंद्र, मोनू, राजू, कुंवरपाल, सचिन, शहजाद, राशिद आदि से वार्ता की। उनकी समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इस संबंध में इन नेताओं ने अधिशासी अधिकारी, उपजिलाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारियों से सोमवार को नगर पंचायत कार्यालय पर बैठक कर समाधान कराने का आश्वासन दिया। दुकानदारों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से भी की है।
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