मेरठ। परेशानियां और खामियां 150 करोड़ रुपये की लागत से बने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। अभी तक इसमें डायलिसिस यूनिट तक तैयार नहीं की गई है। यह हाल तब है जब छह मशीनें आई हुई हैं, लेकिन इन्हें इंस्टाल नहीं किया गया। डायलिसिस के दौरान गंदे पानी के लिए लाइन तक नहीं बनाई गई है।
मेडिकल में सर्जरी कराने के लिए सबसे ज्यादा यूरोलॉजी के मरीज आते हैं, लेकिन यूरोलॉजी विभाग को ही इस अस्पताल में शामिल नहीं किया गया है, जबकि मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट चिकित्सक मौजूद हैं। इस तरह न तो उनका मेडिकल कॉलेज में और न ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इस्तेमाल हो पाएगा। मेडिकल कॉलेज में हर सप्ताह करीब ढाई सौ मरीज यूरोलॉजी केआते हैं। इनमें से कुछ का सर्जरी विभाग में उपचार कर दिया जाता है, अधिकांश को सर्जरी के लिए दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। आयुष्मान के तहत भी सबसे ज्यादा सर्जरी यूरोलॉजी में ही हैं। आयुष्मान के अंतर्गत यूरोलॉजी में 161, न्यूरो सर्जरी में 82, कॉर्डियक सर्जरी में 71, पीडियाट्रिक्स में 34, प्लास्टिक सर्जरी में 30 तरह की सर्जरी रखी गई हैं।
मशीनें कराई जा रही इंस्टाल
मेडिकल कॉलेज केप्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि डायलिसिस मशीनें इंस्टॉल कराई जा रही हैं। शासन से इसे शुरू करने के लिए पत्र भेज दिया गया है। जहां तक यूरोलॉजी की बात है तो यह शासन स्तर से तय किया गया है कि कौन-कौन सी सुविधाएं सुपर स्पेशियलिटी में होनी चाहिए।
यह है यूरोलॉजी
यूरोलॉजी यानि मूत्र रोग विज्ञान आयुर्विज्ञान की वह शाखा है, जो जननांग के रोगों का ज्ञान कराती है। अब भ्रूण वैज्ञानिक, लाक्षणिक तथा नैदानिक कारणों से अधिवृक्क के रोगों को भी इसमें सम्मिलित किया जाने लगा है।
उद्घाटन का इंतजार
सुपर स्पेशियलिटी करीब नौ माह से उद्घाटन की बाट जोह रहा है। इस साल मार्च से हर बार माह की 20 से 30 तारीख के बीच उद्घाटन का दावा किया जाता है, लेकिन हो नहीं पा रहा है। इस बार भी 15 से 30 नवंबर के बीच इसका उद्घाटन करने का दावा किया गया था।