जीएसटी की पेचीदगियां, बढ़ा रही परेशानियां
मेरठ। एक साल से ज्यादा समय होने के बाद भी जीएसटी की पेचीदगियां व्यापारियों को परेशान कर रही हैं। सोमवार को बांबे बाजार स्थित चैंबर ऑफ कॉमर्स में मेरठ डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन की जीएसटी पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें एमआरपी, बिक्री मूल्य और ईवे बिल समेत कई मुद्दे उठे।
व्यापारियों ने उदाहरण दिया कि हौजरी केसामान पर एक हजार रुपये तक पांच प्रतिशत जीएसटी है, जबकि एक हजार से ज्यादा पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। हो यह रहा है कि इस सामान पर 1500 एमआरपी लगाकर उसे व्यापारी को दिया जाता है, मगर बिक्री मूल्य का बिल 899 रुपये बनाया जाता है, यानि बनाने वाले को सिर्फ पांच प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा और उसे आगे बेचने वाले व्यापारी को अगर वह उसे मुनाफे केसाथ एक हजार से ज्यादा में बेचता है तो 12 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा। इससे उसके मुनाफे से ज्यादा टैक्स हो जाता है। उसे रिफंड पांच प्रतिशत का मिलता और टैक्स 12 प्रतिशत का देना पड़ता है। व्यापारियों ने इस व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की। जीएसटी अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि जीएसटी काउंसिल को इससे अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा बैठक में व्यवहारिक परेशानियों के संबंध में जानकारी दी गई। रिफंड और नए प्रावधानों पर भी जानकारी दी गई। बैठक में जीएसटी विभाग से डिप्टी कमिश्नर विवेकानंद शुक्ला, अजय श्रीवास्तव, संजीव पांडेय, व्यापारियों में विनेश जैन मनुल अग्रवाल, अतुल गर्ग और अमरदीप त्यागी आदि रहे।
मार्ग अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर करेगा दिक्कतें दूर
जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि मार्ग अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया गया, जिससे व्यापारियों को जीएसटी के रिटर्न दाखिल करने में आनी वाली समस्याएं काफी कम हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि कई बार व्यापारी छोटे-छोटे सामानों की लिस्ट बनाते हैं, जिससे ईवे बिल बनाने में परेशानी आती है, मगर इस सॉफ्टवेयर में डिटेल भरने पर वह खुद ईवे बिल तैयार कर देगा। यह सॉफ्टवेयर जीएसटी की रिटर्न अपलोड करने में भी सहायक सिद्ध होगा।