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पर्यावरण बचाना है तो इकोलॉजी बने चुनावी मुद्दा: अनिल जोशी

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पर्यावरण बचाना है तो इकोलॉजी बने चुनावी मुद्दा
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी का कहना है पर्यावरण बचाना है तो देश में चुनाव इकोलॉजी के मुद्दे पर लड़ा जाए। विकास नहीं पर्यावरण की बात होनी चाहिए। वायु प्रदूषण बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर नहीं चेते तो स्थिति भयावह होगी। पर्यावरण में सुधार के लिए प्रयोगों की आवश्यकता है। नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर जागरूक और जिम्मेदारी दिख रही है।
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मेरठ में एक पर्यावरण गोष्ठी को संबोधित करने पहुंचे पद्म श्री अनिल जोशी ने प्रेस से बातचीत में कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद इकोनॉमी मुद्दा बनी थी। इस वक्त प्रकृति के साथ मानव की साइलेंट वॉर चल रही है। पर्यावरण में सुधार के लिए यह राजनीति का हिस्सा बनना चाहिए। बात गंगा साफ करने की हो या किसी और शुद्धता की देश में कुछ प्रयोग हुए हैं। वह सफल हुए या नहीं ये अलग बात है, लेकिन ऐसे प्रयोग होने चाहिए। वायु प्रदूषण पर अनिल जोशी ने चिंता वक्त करते हुए कहा कि आंकड़ों का अनुमान बता रहा है कि 2035 तक डीजल की 135 करोड़ गाड़ियां होंगी। डीजल जलवायु के लिए जहर है। गाड़ियों की संख्या पर अंकुश लगाने की जरूरत है। जिंदगी को हम जितनी सरल बनाएंगे, उतना लंबा और स्वस्थ जीवन जी पाएंगे। देश में सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) सूचकांक बनाया जाए। जंगल, पानी, मिट्टी, वायु कैसी है, इसका सूचकांक बने। उत्तर प्रदेश में कुछ प्रजातियों को छोड़कर पेड़ काटने की इजाजत देने के निर्देश पर अनिल जोशी ने नाखुशी जताई। उन्होंने कहा पेड़ों को बचाने की जरूरत है, ऐसी नीति से वन माफिया को लाभ मिलेगा।
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खास बात
मेरठ पहुंचे पद्म श्री और पर्यावरणविद अनिल जोशी ने कहा, राजनीति का हिस्सा बने पर्यावरण
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