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निकाय चुनावों को लेकर प्रशासन के साथ राजनेतिक दलों में हलचल

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निकाय चुनावों को लेकर प्रशासन के साथ राजनैतिक दलों में हलचल
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- इस बार मेरठ में 13 नगर पंचायत, दो नगर पालिकाओं और एक नगर निगम में होगा चुनाव
- भाजपा के लिए नगर पंचायतों के साथ ही नगर पालिका परिषद पर कब्जा करना होगा चुनौती
- अभी तक जनपद में दो नगर पंचायत और नगर निगम पर ही है भाजपा का कब्जा
- फिलहाल आरक्षण को लेकर टिकी है सभी दलों की नजर

मेरठ।
निकाय चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गयी है। 24 या 25 अक्तूबर तक चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नवंबर तक चुनाव होने की संभावना के बीच प्रशासन ने जहां चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। वहीं राजनैतिक दलों में भी हलचल तेज हो गयी है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण निकाय चुनाव में नगर निगम से नगर पंचायतों तक कब्जा करने के लिए जहां भाजपा कवायद करेगी, वहीं अपनों और विपक्षियों के बीच घिरी भाजपा के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इस चुनाव में मेरठ जनपद में एक नगर निगम सहित दो नगर पालिकाओं और 13 नगर पंचायतों में चुनाव होना है।
निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतिम तैयारी शुरू कर दी है। चुनावों की अधिसूचना 24 या 25 अक्तूबर को घोषित होना तय माना जा रहा है। ऐसे में डेढ़ माह के भीतर चुनावी तैयारियों को अंतिम रुप देना प्रशासन के लिए पहली चुनौती होगा। मेरठ में इस समय एक नगर निगम, दो नगर पालिकाएं और 13 नगर पंचायते हैं। पिछली बार दस नगर पंचायतें थी, लेकिन इस बार तीन ग्राम पंचायतों को नगर पंचायतों का दर्जा मिलने पर इनमें भी पहली बार चुनाव होगा। मेरठ नगर निगम के साथ ही नगर पालिकाओं में मवाना और सरधना के साथ ही नगर पंचायतों में परीक्षितगढ़, हस्तिनापुर, बहसूमा, लावड़, दौराला, फलावदा, करनावल, खरखौदा, किठौर, सिवाल, शाहजहांपुर, हर्रा और खिवाई में चुनाव होना है।
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उपजिला निर्वाचन अधिकारी सत्यप्रकाश पटेल के अनुसार नगर निगम में जहां ईवीएम के जरिये मतदान होगा तो नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में मतदान पत्रों से मतदान होगा। लेकिन इससे पहले मतदाता सूची को अंतिम रुप दिया जा रहा है। जिसके लिए 18 अक्तूबर तक बड़ा अभियान शुरू किया जायेगा।
राजनैतिक दलों में शुरू हो चुकी है हलचल
नगर निगम मेरठ में भाजपा मजबूत स्थिति में है। हालांकि एक बार आपसी गुटबाजी और बगावत के चलते बसपा ने महापौर पद पर कब्जा किया था। ऐसे में भाजपा अब नहीं चाहेगी कि फिर से वही स्थिति बने और विपक्षी दलों को इसका लाभ मिले। इसके लिए भाजपा नेतृत्व पूरी सतर्कता बरत रहा है। लेकिन पहले आरक्षण घोषित होने का इंतजार है।

वहीं नगर पालिकाओं की अगर बात करें तो सरधना सीट भाजपा के लिए जहां कमजोर रही है, तो मवाना सीट पर मजबूत स्थिति में होने के बावजूद भाजपा ने भीतरीघात में इस सीट को खोया है। ऐसे में इस बार भाजपा यहां संगठित होकर चुनाव लड़ते हुए इस सीट पर काबिज होने का प्रयास करेगी। जबकि नगर पंचायतों में भाजपा की स्थिति जातिगत आंकड़ों और आपसी गुटबाजी में उलझ जाती है। पिछले चुनाव में भाजपा ने सिबंल पर जहां सिर्फ परीक्षितगढ़ नगर पंचायत में चुनाव जीता था, तो समर्थन से एक और नगर पंचायत में जीत का दावा किया था। लेकिन इस बार भाजपा के लिए 13 नगर पंचायतों में जीत हासिल करना चुनौती होगा। क्योंकि इनमें किठौर, शाहजहांपुर, हर्रा, खिवाई, सिवालखास, लावड़, फलावदा नगर पंचायत जहां मुस्लिम बहुल हैं तो बहसूमा कभी किसी दलीय स्थिति पर नहीं टिकी है। ऐसे में परीक्षितगढ़ के साथ खरखौदा और दौराला ही भाजपा के लिए आसान हो सकती है। जबकि हस्तिनापुर में भाजपा को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।
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वहीं दूसरी तरफ 2019 के चुनाव को देखते हुए निकाय चुनाव में सपा और बसपा के साथ कांग्रेस और रालोद भी कहीं न कहीं प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रुप से सक्रिय नजर आएंगी। ऐसे में भाजपा और विपक्षी दल, आपसी गुटबाजी और जातिगत समीकरण के बीच निकाय चुनाव में फतह हासिल करने के मंथन में जुट गए हैं।
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