मेरठ। हाईकोर्ट ने शहर में बिना पार्किंग प्रबंधन केे जाम का पर्याय बनीं ई-रिक्शाओं के लिए नगर निगम को पार्किंग का इंतजाम करके देने के आदेश दिए हैं। आठ सप्ताह में इस मामले का निस्तारण करने को कहा गया है।
शहर में चल रही ई-रिक्शाओं से रास्ते में खड़े होने और किसी भी चौराहे और सार्वजनिक स्थल पर पार्किंग नहीं होने से जाम लगा रहता है। पार्किंग स्थल की मांग को लेकर ई-रिक्शा एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को मामले का पटाक्षेप आठ सप्ताह में करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के फैसले के अनुसार दो सप्ताह के अंदर रिट दायर करने वाली ई-रिक्शा एसोसिएशन के प्रतिनिधि अपना प्रत्यावेदन नगर निगम को देंगे। इसके रिसीव करने के आठ सप्ताह के अंदर निगम को प्रत्यावेदन का निस्तारण करना होगा। हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एसोसिएशन को गाइड कर रहे आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने बताया कि ई-रिक्शाओं के चलते शहर में जाम लगा रहता है। रिक्शाओं के खड़े होने की कहीं पर भी जगह नहीं है। नगर निगम को इनके लिए हर सार्वजनिक जगह पर पार्किंग की जगह देनी होगी ताकि सड़क पर जाम न लगे।
1600 रजिस्टर्ड ई-रिक्शा, इससे ज्यादा अवैध
शहर में 1600 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। इससे कहीं ज्यादा अवैध दौड़ रही हैं। इन रिक्शाओं की वजह से शहर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा, जहां रोजाना जाम न लगता हो। आरटीओ में नई रिक्शाओं का बिना रूट और जरूरत के ही धड़ल्ले से पंजीकरण हो रहे हैं। अवैध रिक्शाओं पर कोई लगाम नहीं होने से लोग सस्ते और जुगाड़ वाले ई-रिक्शा लेकर सड़क पर चल रहे हैं।
- हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह में मामले का निस्तारण करने के दिए आदेश