मेरठ। बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक 205 किलोमीटर गंगा के क्षेत्र में इस बार 33 डॉल्फिन नजर आई हैं। पिछली बार जहां इनकी संख्या 32 थी वहीं, इस बार खुशी की बात ये है कि इनमें तीन अवयस्क हैं। इससे साफ हो गया है कि गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है। सात महीने पहले बिजनौर बैराज के पास दो डॉल्फिन मृत मिलने से इनकी संख्या गंगा में 30 ही रह गई थी।
डॉल्फिन की गणना के लिए ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ के तहत बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज के बीच 10 अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक अभियान चलाया गया। डब्लूडब्लूएफ के वरिष्ठ परियोजना निदेशक मो. शाहनवाज खान व वरिष्ठ समन्वयक संजीव यादव के मुताबिक इस बार बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर तक 17 डॉल्फिन दिखीं। गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बैराज के बीच सोमवार को 16 डॉल्फिन नजर आईं। कुल मिलाकर इनकी संख्या 33 हो गई है। इनमें तीन अवयस्क हैं।
वरिष्ठ परियोजना निदेशक मो. शाहनवाज खान ने बताया कि करीब सात महीने पहले दो डॉल्फिन बिजनौर बैराज के पास मृत मिली थी। जिसके बाद 30 डॉल्फिन रह गईं थी। इस बार जो 33 डॉल्फिन मिली हैं उनमें तीन अवयस्क हैं। यानी डॉल्फिन प्रजनन कर रही हैं, जो अच्छा संकेत है। मंगलवार को इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर तक तीन डॉल्फिन बढ़ी हैं। तीन अवयस्क डॉल्फिन का मिलना बहुत अच्छा संकेत है।
2-3 साल में प्रजनन
मो. शाहनवाज खान बताते हैं कि डॉल्फिन की उम्र 30 साल के करीब होती है। 10 साल की उम्र में डॉल्फिन वयस्क होती है। डॉल्फिन दो से तीन साल में एक बार प्रजनन करती है।
तीन मिनट का आधार
वन विभाग के अफसर बताते हैं कि डॉल्फिन हर तीन मिनट में एक बार पानी से बाहर आती है। इसी आधार पर इसकी गणना होती है। डॉल्फिन के बारे में माना जाता है कि वो अपने रहने के स्थान से कभी ज्यादा दूर नहीं जाती है।
वर्षवार डॉल्फिन गणना
2015 - बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -11, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 11
2016- बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -13, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 17
2017- बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -17, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 15
2018 - बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर - 18, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 15