यूपी के शामली में गिरफ्तार किया गया करम सिंह उर्फ लंगड़ा पांच वर्ष की उम्र में पंजाब गया था। लंबे समय तक वह पंजाब में रहा और चार साल पूर्व ही रंगाना फार्म पर लौटा था। इसके बाद वह रंगाना फार्म गुरुद्वारे का ग्रंथी बन गया। पुलिस को आशंका है कि पंजाब में रहने के दौरान ही करम सिंह भी खालिस्तान समर्थकों के संपर्क में आया।
झिंझाना थाना प्रभारी ओपी चौधरी ने बताया कि करम सिंह जब पांच साल का था, तब उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। मां ने उसे करम सिंह को पंजाब भेज दिया था। वहां करम सिंह ने भजन कीर्तन सीखने के साथ ही ऐसे लोगों से भी संपर्क बढ़ाया, जो खालिस्तान समर्थक थे। बकौल एसओ, ऐसी सूचनाएं हैं कि वह चार साल पहले रंगाना फार्म गुरुद्वारे का ग्रंथी बना और धार्मिक कट्टरता के लिए लोगों का ब्रेनवॉश कर रहा था। हालांकि रंगाना गांव के लोगों का कहना है कि ग्रंथी करम सिंह गुरूद्वारे में अपने काम से ही मतलब रखता था। किसी भी व्यक्ति से घुलना मिलना उसे पसंद नहीं था और अक्सर खामोश ही रहता था।
परिवार में हैं एक भाई, चार बहनें
करम सिंह की विधवा मां सुखविंदर कौर के मुताबिक करम सिंह चार बहनों व एक भाई में दूसरे नंबर का है और जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग है। सुखविंदर कौर का कहना है कि पंजाब में करम सिंह के संबंध किससे रहे, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वह तो आज भी मजदूरी करके अपना पेट पाल रही है। उसका दूसरा भाई लवजीत सिंह पंजाब में नौकरी करता है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/