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होली

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भद्रा काल में न करें होलिका दहन
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मेरठ।
इस बार होली एक मार्च को मघा नक्षत्र सुकर्मा योग के गुरूवारीय पूर्णिमा पर पड़ रही है। इस दौरान सूर्य देव मीन राशि पर तथा चन्द्र सिंह पर होंगे। भद्रा काल सुबह 8 बजकर 59 मिनट से शाम 7 बजकर 38 मिनट तक ही है। उसके बाद भद्रा मुक्त काल हो जायेगा। भद्रा मुक्त होने के बाद ही होलिका का दहन करें।
हनुमान और भैरव की करें विशेष पूजन
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात होली की सुबह अपने इष्ट देवता के साथ-साथ हनुमान एवं भैरों की पूजा जल, रोली, कलावा, चावल, फूल, गुलाल, चन्दन, नारियल से करें। सभी देवताओं को होली तिलक लगावें। तेल भैरों जी को अर्पित करें। गाय के गोबर की तेरह गोलियां बना कर माला बनाएं और उसे घर में ही टांग दें। सभी प्रकार के अच्छे भोजन, नमकीन, मिठाई बना कर देवताओं को समर्पित करें।
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होलिका पूजन का समय
भद्रामुक्त शुभ घड़ी : सुबह 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक।
विशेष समय : सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 8 बजकर 58 मिनट तक,
होलिका दहन मुहूर्त
रात 7 बजकर 42 मिनट से 11 बजकर 49 मिनट तक।
एक मार्च तक न करेें शुभ कार्य
ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण, ज्योतिष पं. संजय त्रिपाठी, राकेश गौड़ ने बताया कि एक मार्च तक होलाष्टक के कुप्रभाव से बचने के लिए कोई शुभ कार्य न शुरु करें। इन आठ दिनों में शुभ कार्यों से बचना चाहिए। होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक के नकारात्मक प्रभाव भी दहन हो जाते हैं। माना जाता है कि होलाष्टक वाले दिन ही भगवान के त्रिनेत्र द्वारा कामदेव भस्म हो गये थे। इसलिए ये ध्यान देना चाहिए कि ये त्यौहार उमंग के साथ मनाएं, पर संयम व शालीनता का साथ न छोड़ें।
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