लाठी लेकर नहीं आएंगे स्वयंसेवक
- स्वयंसेवकों की संख्या के अनुपात में छोटा पड़ा मैदान
- कतारों के बीच गैप कम करने से लाठी लाने से किया मना
मेरठ।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ‘राष्ट्रोदय’ ऐसा पहला आयोजन होगा, जिसमें स्वयं सेवक लाठी (दंड) लेकर नहीं आएंगे। यह किसी सुरक्षा आदि के कारणों से नहीं बल्कि स्वयं सेवकों की संख्या के अनुपात में मैदान छोटा होने के कारण लिया गया निर्णय है।
संघ परिवार ने राष्ट्रोदय में 2.51 लाख स्वयं सेवकों का लक्ष्य तय किया था। लेकिन स्वयं सेवकों के उत्साह ने तमाम बंदोबस्त को बोना सिद्ध कर दिया। राष्ट्रोदय में कुल 3.14 लाख पंजीकरण हो चुके हैं। ऐसे में मैदान की क्षमता कम हो गई है। आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल ने बताया कि शाखा के दौरान स्वयं सेवकों के बीच दो-दो मीटर का फासला होता है। ताकि वह शारीरिक व्यायाम और दंड आदि की क्रियाएं आराम से कर सकें। लेकिन स्वयं सेवकों की संख्या के कारण यह फासला अब डेढ़ मीटर कर दिया गया है। अजय मित्तल के अनुसार यदि दो-दो मीटर का फासला रखते हुए चिन्हांकन किया जाता तो इससे डेढ़ गुना मैदान की जरूरत पड़ती। इसलिए स्वयं सेवकों के बीच की दूरी कम की गई। दूरी कम होने के कारण दंड क्रिया नहीं हो सकती है, इसलिए स्वयंसेवकों को लाठी लाने से मना किया गया है।