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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव......

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आगे बढ़ सकते हैं जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव
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- 17 को राष्ट्रपति चुनाव और 28 जुलाई तक विधानसभा सत्र है कारण
- भाजपा नेतृत्व की रणनीति विधायक और सांसद चुनाव में निभाये सक्रिय भूमिका

मेरठ।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीख आगे बढ़ सकती है। इसके पीछे भाजपा की अपनी रणनीति मानी जा रही है। एक तरफ जहां राष्ट्रपति चुनाव हैं तो दूसरी तरफ विधानसभा सत्र भी शुरू हो जायेगा। ऐसे में विधानसभा सत्र के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव कराने की सोच भाजपा की है। ताकि जनप्रतिनिधियों को चुनाव में सक्रिय कर चुनाव परिणाम अपनी तरफ मोड़ा जा सके।
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष के उप चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। जिसके अनुसार 17 जुलाई को नामांकन और 23 जुलाई को मतदान होना है। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकाें की सक्रियता कम रहेगी। इसका कारण 17 जुलाई को राष्ट्रपति का चुनाव होने के साथ ही सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू होना है। चूंकि विधानसभा 28 जुलाई तक चलेगा, ऐसे में भाजपा नेतृत्व का सोचना है कि चुनाव इसके बाद हों, ताकि विधायक अपने -अपने क्षेत्र में सक्रिय होकर जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव का परिणाम पार्टी के पक्ष में दे सकें। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 28 या 30 जुलाई को नामांकन और 7 से 10 अगस्त के बीच मतदान की तिथि तय कराने की कवायद भाजपा की तरफ से हो रही है।
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भाजपा नेता कर रहे चुनाव पर गंभीर मंथन
जिला पंचायत अध्यक्ष के उप चुनाव में मुजफ्फरनगर सांसद और केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान भी मेरठ में सक्रिय नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रविवार को उन्होंने और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने उपचुनाव को लेकर मंथन किया। इस दौरान कई सदस्यों से भी बात की। इस दौरान पूर्व में चुनाव लड़े जिला पंचायत सदस्य कुलविंदर सिंह की मौजूदगी अहम मानी जा रही है।
भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनते ही सपा नेता अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटाने की कवायद शुरू कर दी थी। इस कवायद में 34 में से 28 सदस्याें का अविश्वास प्रस्ताव के लिए भाजपा को समर्थन मिल गया था, जिस पर सीमा प्रधान ने अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।
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ऐसे में अब भाजपा के लिए उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। स्थानीय भाजपा नेतृत्व के साथ जनप्रतिनिधियों की साख भी दांव पर लगी है। क्योंकि मेरठ जनपद की सात विधानसभा सीटों में से छह पर भाजपा के विधायक निर्वाचित है। इसके अलावा चारों संसदीय क्षेत्र के सांसद भी भाजपा से हैं। इस उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को जिताना भाजपा के लिए जहां प्रतिष्ठा का प्रश्न है तो वहीं विपक्ष की चाल ने चुनौती भी पेश कर रखी है। जिससे पार पाने के लिए नेतृत्व लगातार मंथन करने में जुटा है।
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