प्रत्येक वार्ड में बनाए जाएंगे कर्मचारियों के हाजिरी स्थल
हरे, नीले और काले रंग के होंगे डस्टबिन
मेरठ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर मेें दो बार लगाए गए डस्टबिन डिब्बे बन गए। इनका शहर की सफाई व्यवस्था में तो कोई योगदान नहीं रहा, हां नगर निगम का खजाना जरूर साफ हो गया। अब तीसरी बार डस्टबिन लगाने का कार्य होगा। डस्टबिन पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पूर्व में लगाए गए प्लास्टिक के कुछ डस्टबिन को शरारती तत्वों ने जला दिया था, जबकि कुछ को लोग चोरी करके ले गए। इससे दो-तीन माह में निगम को करीब 60 लाख रुपये का फटका लगा था। इस बार फिर से प्लास्टिक के डस्टबिन लगाने की तैयारी की जा रही है।
60 लाख खर्च हुए थे डस्टबिन पर
निगम ने महानगर में जगह-जगह हरे और नीले रंग के डस्टबिन लगवाए थे। जनता ने इन्हें लगाते समय ही विरोध किया था, लेकिन निगम नहीं माना। इसके कुछ समय बाद रात में कुछ डस्टबिनों में आग लगा दी गई, जबकि कुछ चोरी हो गए। इससे निगम को खजाने को 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। छह माह के भीतर डस्टबिन धरातल से गायब हो गए।
दूसरी बार लगवाए स्टील के डस्टबिन
स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में सफलता के लिए निगम प्रशासन ने शहर की सड़क और प्रमुख स्थानों पर स्टील के डस्टबिन लगवाए। जिनकी सुंदरता की तारीफ भी हुई, लेकिन रात के अंधेरे में आधे से अधिक डस्टबिन को लोग उखाड़कर ले गए।
अब फिर प्लास्टिक के डस्टबिन लगाने का प्लान
निगम प्रशासन ने एक बार फिर शहर के कुछ प्रमुख स्थानों पर तीन-तीन डस्टबिन प्लास्टिक के लगवाने की कार्य योजना तैयार की है। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने हाल ही में सभी सफाई इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए कि वह शहर के प्रत्येक वार्ड में हाजिरी स्थलों का चयन करें। जहां पर सफाई कर्मचारी एकत्र होकर बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी लगा सकें। साथ ही कुछ ऐसे स्थानों का भी चयन करें। जहां पर नीला, हरा और काले रंग का डस्टबिन लगवाया जा सके।
सुरक्षित स्थानों पर लगाएंगे डस्टबिन
सफाई कर्मचारियों के हाजिरी स्थल और डस्टबिन लगाने के लिए स्थानों की चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी सफाई इंस्पेक्टर सुरक्षित स्थानों की सूची सौंपेंगे। - डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी