बिजली के गलत बिलों से उपभोक्ताओं को लग रहा करंट
बिल ठीक कराने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोग
अमर उजाला ने की पड़ताल, तो सामने आई उपभोक्ताओं की परेशानी
मेरठ। राजस्व वसूली लक्ष्य को पूरा करने के चक्कर में पीवीवीएनएल उपभोक्ताओं को अनाप-शनाप बिल भेज रहा है। महीने में 15-16 हजार बिल वाले प्रतिष्ठानों को लाखों के बिल भेजकर परेशान किया जा रहा है। हालात ये हैं कि पीडी (स्थायी विच्छेदन) हो चुके कनेक्शनों के भी बिल भेजे जा रहे हैं। बिल ठीक कराने के लिए उपभोक्ता आफिसों के चक्कर काट रहे हैं। यहां बिल ठीक करने की बजाय जमा करने और अगले बिल पर इसे ठीक कराने को कहा जा रहा है। ऐसा नहीं करने पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। अमर उजाला ने इस मामले की पड़ताल की, तो हालात गंभीर मिले।
केस नंबर एक : भोला रोड निवासी महेश विरमानी की रतननगर में दुकान है। कनेक्शन पर लगा मीटर अगस्त 2012 में खराब हो गया था। मीटर रीडर बिल बनाने पहुंचा तो मशीन से बिल नहीं निकल सका। उपभोक्ता ने मीटर बदलने की अर्जी लगाई तो कनेक्शन को ही स्थायी रूप से कटा दिखा दिया। महेश ने इसकी शिकायत की। तत्कालीन एसडीओ ने अपनी गलती से कनेक्शन को पीडी करना स्वीकार किया और नए सिरे से कनेक्शन देने के निर्देश दिए। आज तक महेश का कनेक्शन चालू नहीं हुआ है। अब महेश को करीब सात साल बाद 1.34 लाख रुपये का बिल भेज दिया गया।
केस नंबर दो : शशांक गर्ग की उद्योगपुरम में फैक्ट्री है। शशांक के कनेक्शन पर जनवरी माह में 14 लाख रुपये का बिल भेजा गया। फरवरी माह में 16 हजार रुपये का बिल भेजा गया। मार्च माह में 16 लाख रुपये का बिल बनाकर भेजा गया। शशांक ने इसे ठीक कराया तो बिल 1.84 लाख रुपये का बना। इसमें 14 लाख रुपये पर ही लेट पेमेंट 40 हजार रुपये जोड़ दिया गया। अब शशांक इसे ठीक कराने के लिए चक्कर काट रहा है। शशांक का कहना है कि उसे डर है कि कहीं विभाग उनका कनेक्शन न काट दे।
केस नंबर तीन : नई बस्ती निवासी रमेश की दुकान पर दो किलोवाट का कनेक्शन लगा है। रमेश बताते हैं कि तीन महीने पहले आए बिल को जमा करा दिया था। अगले महीने के बिल में एरियर जुड़कर आ गया। उसने विद्युत विभाग के ऑफिस पहुंचकर बिल को ठीक कराया और फिर जमा कर दिया। अगले महीने बिल में फिर एरियर जुड़कर आ गया। अब वह परेशान है और विद्युत विभाग के कर्मचारी मदद नहीं कर रहे हैं।
लाखों रुपये की लूट
मेरठ शहर में हर महीने करीब पौने तीन लाख उपभोक्ताओं के बिल बनते हैं। करीब सवा दो करोड़ रुपये बिल रोजाना जमा होता है। मेरठ शहर से हर साल 700 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिल वसूला जाता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिलों में हर महीने लाखों रुपये लास्ट बिल एरियर के रूप जुड़कर जा रहे हैं। जागरूक उपभोक्ता तो जूझकर बिल ठीक करा लेता है, सीधे-साधे उपभोक्ता तो बिना देखे ही जमा करा देते हैं। पश्चिमांचल की बात करें तो यह लूट काफी बड़ी हो जाती है।
नहीं मिल रहा ड्यू डेट से पहले बिल जमा करने का फायदा
विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं को ड्यू डेट से पहले बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को बिल राशि पर एक फीसदी छूट देने की सुविधा दी है। इसके बाद उपभोक्ता से ड्यू डेट वाली राशि ली जाती है। बिल पर बिफोर ड्यू डेट अमाउंट और ड्यू डेट अमाउंट अंकित होना जरूरी है। लेकिन नई मशीनों से बन रहे बिलों में यह सुविधा गायब है। उपभोक्ताओं को पूरा बिल जमा करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बिलिंग सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी कमी के चलते बिलों में गड़बड़ी हो रही है। इस खामी को ठीक कराया जा रहा है। जो अधिकारी गलत बिलों को ठीक करने में उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ