मऊ के जिला अस्पताल परिसर स्थित योग वेलनेस सेंटर।
- फोटो : MAU
मऊ। आगामी 21 जून को विश्व योग दिवस है इसे लेकर जिले में तैयारी शुरू भी कर दी गई हैं। लेकिन जिले में योग को लेकर बेहतर सुविधाएं न होने से योग साधक इसका लाभ नहीं मिल रहा। जिला अस्पताल में 1 जून 2018 को बना योगा वेलनेस सेंटर खुद बीमारी की दशा में है तो वो दूसरे को स्वस्थ्य कैसे रखेगा ? अव्यवस्था के चलते योग वेलनेस सेंट गुमनामी के बीच संचालित हो रहा हैं। अस्पताल के एक दम पिछले हिस्से के छोटे से कमरे में संचालित होने के चलते इस सेंटर में न के बराबर योग साधक ही जा पाते हैं। जिले में इस केंद्र को संचालित करने के लिए छह प्रशिक्षकों को नियुक्त किया गया है, लेकिन वह भी भौतिक सत्यापन नदारद है।
जिले में लोगों को जीन विधा से योग के जरिए ठीक करने की व्यवस्था की गई है। इसमें एक विधा आयुर्वेद, दूसरा होम्योपैथ और तीसरा यूनानी विधा है, तीनों विधा से योग का संचालन किया जाता है। इन सबके बीच जिला अस्पताल में पोषण पुर्नवास केंद्र के पास एक छोटे से कमरे में योगा वेलनेस सेंटर का संचालन होता हैं। लेकिन यहां सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटे से कमरे में खुले योग वेलनेस का उद्देश्य था कि आगामी एक वर्ष में इस केंद्र को और बढ़ाना था। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग साधक के रुप में इससे जुड़े, लेकिन करीब दो साल का समय बीतने के बाद भी इस केंद्र का उत्थान नहीं हो सका। परिणाम है कि यहां केवल दस से 15 साधक पहुंच पाते हैं।
नहीं होता सुबह का योगाभ्यास
मऊ। 21 जून को विश्व योग दिवस है, इसको लेकर आयुर्वेदिक चिकित्सा विभाग की तरफ से तैयारी शुरु कर दी गई है। इस दौरान एक दिन योग की साधना की जाएगी। लेकिन यह क्लास प्रति दिन नहीं चलता। क्योंकि केंद्र के पास स्थान का अभाव है। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डा. जयराम यादव का कहना है कि ऐसी व्यवस्था उनके पास नहीं है कि वो लोगों को इस तरह की सेवा दे सकें।
कासिमपुर में भी हैं योगा वेलनेस सेंटर
मऊ। यूनानी विधा में दूसरा योगा वेलनेस सेंटर जिले के परदहा ब्लॉक के कासिमपुर गांव में संचालित है। यहां एक कमरे में संचालित इस योग वेलनेस सेंटर में कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही सुविधाएं ना के बराबर है। बात करने पर पता चला कि जिला अस्पताल में मौजूद योग वेलनेस सेेंटर में करीब दो हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसी तरह से कासिमपुरा में 25 सौ लोगों ने पंजीकरण कराया है। लेकिन हकीकत इस कागजी लिखा पढी से इतर है। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डा. जयराम यादव के अनुसार साल भर में 35 शिविर कराने का दावा किया। लेकिन हकीकत कुछ अलग है।