विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को लेखपालों ने सभी तहसील मुख्यालयों पर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित छह सुत्रीय मांग पत्र एसडीएम को सौंपा।
धरने में सदर तहसील के अध्यक्ष बालचंद यादव ने कहा कि लेखपाल की मांगों को लेकर सरकार गंभीर नहीं है इसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है। उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो उनका आंदोलन और तेज होगा। घोसी संवाददाता के अनुसार लेखपाल संघ द्वारा अपनी लंबित 4 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को तहसील प्रांगण में सभा, धरना प्रदर्शन करने के साथ मांग पत्र उपजिलाधिकारी टी पी वर्मा को सौंपा गया। प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व निरीक्षक पद को प्रमोशन से भरने के आदेश का स्वागत किया गया। संघ के अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा की हम लेखपाल दिन रात लगकर जनता की सेवा करने के साथ विभागीय कार्य करते हैं। फिर भी हम लोगों को वेतन, सुविधा के नाम पर बहुत कम मिलता है। वादा करने के बाद भी सरकार ने योग्यता बी ए करने के बाद भी पद को राजस्व उपनिरीक्षक नहीं घोषित किया। न ही ए सी पी की विसंगतियों को दूर किया गया। अभी तक लैपटॉप व स्मार्ट फोन नहीं दिया गया। इसके चलते परेशानी हो रही है। हमारी लंबित जायज मांगे नहीं मानी गई तो 17 अक्टूबर से ई डिस्ट्रिक का कार्य आय, जाति प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य नहीं होगा। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कार्यक्रम का संचालन तहसील महामंत्री रघुनाथ ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से अगस्त राजभर, अजय यादव, संजय दुबे, कतवारू यादव आदि लेखपाल रहे। मधुबन संवाददाता के अनुसार समाधान दिवस में स्थानीय तहसील में कार्यरत लेखपालों ने तहसील से ब्लाक तक जुलूस निकाला और नारेबाजी की। इसके बाद ब्लाक में उपजिलाधिकारी को मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन दिया। ज्ञापन में लेखपाल की शैक्षिक अहर्ता स्नातक करने व पदनाम राजस्व उप निरीक्षक करने तथा प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे दो हजार से बढ़ाकर 2800 किये जाने, एसीपी विसंगति दूर करने लैपटॉप व स्मार्टफोन उपलब्ध कराने, लेखपाल को निजी अनुरोध पर किसी भी जनपद में स्थानांतरण करने संबन्धी लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन का मांगपत्र सौंपा।