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विश्व योग दिवस: हर वर्गो में युवा प्रशिक्षक जगा रहे योग की अलख

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मऊ। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की विषम परिस्थिति में योग का महत्व बढ़ा है। इस विपरित समय में कई संक्रमित मरीजों ने भी नियमित योगाभ्यास कर संक्रमण पर विजय पाई। बीते कुछ वर्षो में देखा जाए तो योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े योगाचार्य लोगों के जीवन की दिशा और दशा बदल रहे हैं।
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संक्रमण काल के चलते बीते डेढ़ वर्षों से योग शिविरों पर विराम सा लग गया है। लेकिन इससे पहले पार्क, गली, मोहल्लों में लोग आसानी से खुले में योग का अभ्यास करते दिख जाते थे। योग को लेकर आयुर्वेद तथा यूनानी विधा में संचालित दो योगा वेलनेस सेंटर के योग प्रशिक्षकों द्वारा योग की दिशा में सराहनीय प्रयास कर रही हैं। फिर भी अपने शहर में कुछ खास योग प्रशिक्षक ऐसे हैं, जो निस्वार्थ भाव से योग की अलख जगा रहे हैं तो लोगों को रोग मुक्त करके सकारात्मक सोच भी दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अमर उजाला की ओर से ऐसे ही योग साधकों की शख्सियत और उनकी सेवाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इनमें पहला नाम कासिमपुर के योग प्रशिक्षक नकुल आर्य का नाम है। नकुल गांव में नियमित योग की कक्षा में बच्चों को योग की ट्रेनिंग देते हैं । नकुल बताते हैं कि वर्ष 2019 से राजन वैदिक से प्रशिक्षण प्राप्त करके अब लोगों को सीखा रहे हैं। वहीं मझवारा निवासी विनय योगी ने बताया कि वह कि वह वर्ष 2012 से दुर दराज के गांवों में निशुल्क योग सिखाता हूं। अनेक योग प्रशिक्षक तैयार किये हैं जो गांव में निशुल्क योग कक्षा लगाकर नियमित योगाभ्यास करा रहे हैं।
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वहीं फैजुउल्लहपुर निवासी 16 वर्षीय रंजू बताती है योग से काफी उत्साहित है। बताती है कि नामी योग संस्थान से प्रशिक्षण लेकर निशुल्क रूप से अपने विद्यालय और आसपास के बच्चों को योग सिखाती हैं। संक्रमण काल के चलते योग शिविर का आयोजन न होने की स्थिति में उनके द्वारा आनलाइन योग का अभ्यास कराया जाता है। वहीं घोसी तहसील के हसनपुर निवासी गीता यादव बताती है कि कोरोना संक्रमण काल में योग को लेकर काफी महत्व बढ़ा। उन्होंने आनलाइन अपने रिश्तेदार, मित्र, पड़ोसियों को इस संक्रमण से बचाव के लिए योगाभ्यास कराया।
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