मऊ। मऊ जिले में धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पताल में बिना डिग्री के डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। शनिवार को रतनपुरा में स्टाफ नर्स द्वारा असुरक्षित प्रसव में महिला की मौत का मामला थमा भी नहीं था कि शहर कोतवाली थाना के भीटी के अंधा मोड़ के पास सोमवार सुबह पांच बजे बिना डिग्री की महिला डॉक्टर के अवैध अस्पताल में उपचार के दौरान एक महिला की मौत होे गई। महिला की मौत के बाद डॉक्टर अस्पताल छोड़ कर फरार हो गई। मृतक के परिजन कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना के बाद कुछ देर बाद पुलिस पहुंची परिजनों को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे। अवैध अस्पताल सीएमओ कार्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर दो मंजिला मकान में मात्र दो बेड लगाकर चलाया जा रहा था।
बलिया के फेफना निवासी लक्ष्मी (45) की तबीयत खराब होने के बाद उसे जनपद मुख्यालय के कोतवाली क्षेत्र के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान बीती रात को महिला की हालत खराब होने लगी। चिकित्सक ने प्लेटलेट्स कम होने की बात कहकर इंजेक्शन लगाने की बात कही। इंजेक्शन लगाने के दाैरान ही महिला की हालत बिगड़ने लगी, गंभीर होने पर डॉक्टर ने मरीज को वाराणसी रेफर करने लगे। एबुलेंस आने के दौरान ही महिला की मौत हो गई। परिजन डॉक्टर से शिकायत करने गए तो वह महिला डॉक्टर वहां से भाग गई। मृत महिला के साथ आए कौशल कुमार ने बताया कि मरीज को बुखार होने के बाद उसे यही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रात में अचानक तबीयत खराब होने के बाद डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने के बाद हालत और अधिक खराब होने से मौत हो गई।
अवैध अस्पताल को किया गया सील
मऊ। सीएमओ कार्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर चल रहे अवैध अस्पताल की शिकायत के बाद सीटी मजिस्ट्रेट ब्रजेंद्र सिंह, सीओ सीटी अंजनी कुमार पांडेय और सीएमओ डॉ. नंद कुमार मौके पर पहुंचे और अस्पताल के रजिस्ट्रेशन की जांच की। जिसमें अस्पताल का न तो पंजीकरण मिला और न ही वहां पर कोई मौजूद था। प्रशासन, पुलिस और चिकित्सा विभाग की टीम ने तत्काल भवन को सील कर दिया।
रविवार को भी स्टाफ नर्स के अस्पताल में प्रसूता की हुई थी मौत
हलधरपुर थाना के रतनपुरा सीएचसी के पास ही स्टाफ नर्स द्वारा अवैध रूप से चलाए जा रहे अस्पताल में असुरक्षित प्रसव के दौरान ही प्रसूता सरोज चौहान की मौत हो गई थी। जबकि उसकी नवजात बच्ची को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार स्टाफ नर्स की नियुक्ति देवरिया जनपद में हैै, लेकिन वह रतनुपरा में ही सीएचसी के पास ही अपना अस्पताल चला रही है।
पांच महीने में सात लोगों ने गवांई जान
जनपद में पिछले पांच माह में ऐसे अवैध अस्पतालों में सात लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों के परिजनों के शिकायत के बाद अभी तक किसी भी अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
केस 1- मधुबन के कटघरा के फर्जी अस्पताल में एक महिला की उपचार के दौरान मौत होने पर चिकित्सक ताला बंद कर फरार हाे गया।
केस 2- शहर के एक अस्पताल में जच्चा और बच्चा की मौत के बाद हुई शिकायत के बाद जांच में अस्पताल अवैध रूप से संचालित पाया गया।
केस 3- मिर्जाहादीपुरा के एक अस्पताल में महिला के शरीर में खून की कमी होने के बाद भी डॉक्टर ने ऑपरेशन कर दिया था। इससे महिला की मौत हो गई थी।
केस 4- मझवारा में एक अवैध अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई, मौत के बाद चिकित्सक अस्पताल पर ताला बंद करने के बाद फरार हो गया।
केस 5- हलधरपुर थाना के नसीराबाद कला चट्टी पर महिला को गलत इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई थी। जब तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचते चिकित्सक वहां से फरार हो गया था।
-
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम और प्रशासन व पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। जांच के दौरान वहां कोई अस्पताल नहीं पाया गया है। जिस नाम के अस्पताल की शिकायत की गई थी, उस नाम का विभाग में किसी अस्पताल का पंजीकरण नहीं है। फिलहाल भवन को सील कर दिया गया है। आगे की जांच जारी है।
- डॉ. नंद कुमार मुख्य चिकित्साधिकारी