मऊ। मौसम में बदलाव से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। तेज धूप निकलने से गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। तापमान बढ़ने से फसल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों ने खेतों में नमी बनाए रखने की सलाह दी है।
जिले में लगभग 95 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की गई है। शीतलहर का दौर खत्म होते ही सूरज के तेवर तल्ख होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। गेहूं और जौ की फसल के लिए अधिकतम अधिकतम 18 से 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान आठ से दस डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। सोमवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में तेजी से बदलाव से किसानों को गेहूं की पैदावार कम होने की चिंता सताने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 120 से 135 दिन में पकने वाली गेहूं की प्रजातियों में 20 से 30 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। खेतों में नमी बनाए रखने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के प्रभारी डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि पछुआ हवा और तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। तापमान बढ़ने का क्रम जारी रहा तो गेहूं की बालियों में दाने छोटे हो सकते हैं। इससे उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। किसानों को गेहूं की सिंचाई करने के 20-22 दिन के अंंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। कुसम्हा: मौसम में आए बदलाव से किसानों को गेहूं, जौ सहित अन्य फसलों के उत्पादन कम होने की चिंता सताने लगी है। इस संबंध में किसान श्रीप्रकाश राय, जयप्रकाश राय, साम दात्त, हरेराम विश्वकर्मा, दयानंद का कहना है कि मौसम काफी गर्म होने के कारण गेहूं की दोबारा सिंचाई करनी पड़ रही है। काफी लागत लगाकर गेहूं की बोआई की थी। इस बार ठंड तापमान तेजी से बढ़ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है।