शासन की ओर से त्यौहारों पर शहरों मेें 24 घंटा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे बिजली आपूर्ति करने की कार्ययोजना के सफल होने पर ग्रहण लग सकता है। जिले के अधिकांश विद्युत उपकेंद्र बदहाल हैं। लंबे समय से विभाग में भर्ती प्रक्रिया बंद होने से बिजलीकर्मियों की भारी कमी है। उपकेंद्र ठेका कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में आपूर्ति व्यवस्था दयनीय बनी हुई है। वहीं नवरात्र पर्व का पांच दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों को लिखित शासनादेश नहीं मिला है।
नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में 37 विद्युत उपकेंद्र हैं। शासन की ओर से नवरात्र सहित अन्य त्यौहारों पर शहरों में 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे विद्युत आपूर्ति करने की कार्ययोजना बनाई गई है, लेकिन नवरात्र पर्व का पांच दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों को लिखित शासनादेश नहीं मिला है। इससे शेड्यूल के अनुरूप बिजली मिलना मुश्किल ही लग रहा है। विद्युत उपकेंद्रों में लगी मशीन तथा विद्युत उपकरण काफी पुराने हो गए हैं। ओवरलोड के चलते बार-बार ट्रिपिंग से विद्युत आपूूर्ति बाधित होने का सिलसिला जारी है। जिले के अधिकांश गांवों में दशकों पूर्व विद्युतीकरण कराया गया है। गांवों में बिछाए गए तार व पोल जर्जर हाल में हैं। वहीं अधिकांश विद्युत उपकेंद्र ठेका कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। 630 कर्मचारियों के सापेक्ष लगभग 331 कर्मचारी ही तैनात हैं। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो जिले में 170,000 उपभोक्ता हैं। मऊ नगर, कोपागंज, घोसी, अदरी, पूराघाट सहित विभिन्न क्षेत्रों में 80 प्रतिशत बुनकरों को कनेक्शन दिया गया है। शासन की ओर से सब्सिडी मिलने के चलते विभाग को राजस्व नहीं मिलता है।