अगर पार्टी का मुखिया ही चुनाव प्रचार करने नहीं जाएगा तो वहां पार्टी की हार तय है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा के प्रत्याशी के लिए सुभासपा का हर एक कार्यकर्ता आजमगढ़ में कई दिनों तक डटा रहा। इसके साथ ही सुभासपा प्रमुख ने कहा कि यूपी में हम बसपा-कांग्रेस से बड़ी पार्टी बन गए हैं। आज धरातल पर भाजपा के बाद अगर किसी पार्टी की चर्चा है तो वह सुभासपा है।
उन्होंने बताया कि 12 जुलाई को प्रदेश कार्यालय पर प्रेस वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति चुनाव को लेकर आगे की रणनीति की घोषणा भी करेंगे। बैठक में हम तय करेंगे कि सुभासपा के छह विधायक किसे वोट करेंगे। बता दें कि गुरुवार को लखनऊ में राष्ट्रपति के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा के साथ सपा, रालोद और कांग्रेस की बैठक हुई थी। इसमें सुभासपा को नहीं बुलाने पर राजभर ने नाराजगी जताई थी। यहां तक कहा था कि लगता है अखिलेश को उनकी जरूरत नहीं है।