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राजनीति में शुचिता के पर्याय थे उमानाथ सिंह : रवींद्र

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पूर्व मंत्री उमानाथ सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में मंचासीन अतिथिगण। कॉलेज
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जौनपुर। उमानाथ सिंह राजनीति में शुचिता के पर्याय थे। उनके व्यक्तित्व में सहजता सरलता एवं मृदुभाषिता का समावेश था। ये बातें स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीकरण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान की ओर से पूर्व मंत्री अमर शहीद उमानाथ सिंह की 32वीं पुण्यतिथि पर टीडी कॉलेज के बलरामपुर सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में व्यक्त किया।
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उन्होंने कहा कि जिन दिनों पूरे देश में कांग्रेस की तूती बोलती थी, उन दिनों उमानाथ सिंह ने राजनीति में पदार्पण किया। वे सत्ता की राजनीति करते तो कांग्रेस का दामन थामते, परंतु उन्होंने सत्ता की बजाय पं. दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा को चुना जो समाज के अंतिम व्यक्ति को रहने, खाने की सुविधा उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। उमानाथ सिंह ने पूर्वांचल की राजनीति को नई दिशा दी। सत्ता द्वारा प्रायोजित अत्याचारों का विरोध करते हुए उन्होंने प्राणोत्सर्ग किया। विशिष्ट अतिथि विधायक रमेश मिश्रा ने अनेक संस्मरणों के माध्यम से स्व. उमानाथ सिंह के शील, संयम और अनुशासनप्रियता पर प्रकाश डाला।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह ने कहा कि उमानाथ सिंह ने व्यापारियों की समस्या की लड़ाई के लिए हमेशा संघर्ष किया और इस संघर्ष में वह शहीद हो गए। विशिष्ट अतिथि खेल व युवा कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि वे प्रदेश के जिस भी कोने में जाते हैं वहां जौनपुर का होने के कारण लोग मुझसे स्व. उमानाथ सिंह के बारे में पूछते हैं। इसी से उस विराट व्यक्तित्व की लोकप्रियता का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। पूर्व सांसद केपी सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह व भाजपा नेता धर्मेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल में फल वितरित किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. आरएन त्रिपाठी, वशिष्ठ नारायण सिंह, अरविंद सिंह, कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर, राज बहादुर सिंह ने अपने विचार व्यक्त किया।
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इस दौरान भाजपा मछली शहर के जिलाध्यक्ष अजय कुमार सिंह, जौनपुर सदर के अध्यक्ष अजीत प्रजापति, प्रबंधक राघवेंद्र प्रताप सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, प्राचार्य डॉ. रामआसरे सिंह, पूर्व प्राचार्य डॉ. विनोद सिंह, दुष्यंत सिंह, वीरेंद्र सिंह एडवोकेट, राजवीर सिंह राजा, डॉ. अजय दुबे, डॉ. राजदेव दुबे, प्रो. विजय सिंह उपस्थित रहे। संचालन पूर्व प्राचार्य डॉ. समरबहादुर सिंह तथा आभार पूर्व सांसद केपी सिंह ने व्यक्त किया।
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