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रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में सालों से बंद है अल्ट्रासाउंड

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मऊ। सरकारी अस्पतालों में लाखों की लागत से संसाधन मुहैया तो कराए जा रहे लेकिन इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले में मौजूदा समय में 50 से ज्यादा सरकारी अस्पताल हैं लेकिन यहां एक भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। दोनों बड़े सरकारी अस्पताल महिला तथा पुरुष जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा काफी समय से बंद है। ऐसे में मरीज प्राइवेट सेंटरों में जांच कराने को मजबूर हैं। दोनों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन यहां रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। जिससे यहां जांच नहीं हो पा रही है। जिले में 50 से ज्यादा सरकारी अस्पतालों में केवल जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने से यहां आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हो चुका है, लेकिन यहां पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के चलते बाहर जांच कराने को बाध्य होना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 100 से 120 मरीज ऐसे होते हैं जिनकी सिटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासांउड जांच की जरूरत होती है। इसमें 30-40 मरीज मेडिको लीगल वाले होते हैं।लेकिन यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट द्वारा इस्तीफा देने के बाद से यहां पर बीते कई माह से एक भी अल्ट्रासांउड जांच नहीं हुई है। किन इनके द्वारा मशीन की खराबी का दावा कर नहीं बैठने से जांच प्रभावित हो रही है। यहीं स्थिति 2019 से महिला जिला अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते यहां भी जांच बंद है। ओपीडी में आने वाले अधिकतर मरीजों को प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड की जांच की जरूरत होती है। लेकिन यहां जांच न होने से जरूरतमंदों को निजी सेंटरों में जाकर जांच करानी पड़ती है। हरपुर से आए रामलाल यादव ने बताया कि वह पत्नी का उपचार कराने महिला अस्पताल पहुंचे। यहां उपचार तो मिला लेकिन अल्ट्रासाउंड उन्होंने बाहर जाकर कराया। नगर के ब्रह्मस्थान निवासी राजेश्वर ने बताया कि अपनी बहू का उपचार कराने महिला अस्पताल पहुंचे। यहां महिला चिकित्सक ने उपचार के बाद अल्ट्रासाउंड जांच लिखा। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने पर बाहर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। जिला अस्पताल में जून 2018 से ही रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली था। ऐसे में मेडिको लीगल वाले मरीजों को सीटी स्कैन के लिए आजमगढ़ और एक्सरे के लिए बलिया रेफर होना पड़ता था। गर्भवतियों को निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता था। समस्या को देखते हुए मार्च 2019 में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नवीनचंद्र सिंह की तैनाती हुई लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जिससे समस्या फिर वहीं आ कर टिक गई। जिले की तीन सीएचसी फतेहपुर मंडाव, रतनपुुरा तथा मुहम्मदाबाद गोहना पर रेडियोलॉजिस्ट की कमी को देखते हुए यहां टेली रेडियोलॉजी की सुविधा स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध कराई है। यहां प्रतिमाह एक हजार से ज्यादा मरीजों को राहत मिल रही है। लेकिन जिले के दोनों बड़े सरकारी अस्पताल में जब तक रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं होता वहां भी टेली रेडियो की सुविधा मिले तो मरीजों को राहत मिल सकती है। सीएमओ डॉ. एसएन दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती थी, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया। ऐसे में शासन को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।

रामलाल यादव। अल्ट्रासाउंड की खबर में प्रतिक्रिया- फोटो : MAU

राजेश्वर पांडेय। अल्ट्रासाउंड की खबर में प्रतिक्रिया- फोटो : MAU

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