मधुबन (मऊ)। संक्रमण की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी तथा अव्यवस्था से पनपे नकारात्मक माहौल के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने इससे सबक नहीं लिया।ऐसा ही कुछ लापरवाही फतेहपुर मंडाव सीएचसी पर देखने को मिल रही है। यहां तीन वर्ष पूर्व एक्सरे के लिए आई लाखों की मशीन आज तक इंस्ट्राल नहीं हो सकी। हालात यह है कि सड़क हादसे में घायल या दूसरे मामलों के मरीजों उपचार तो सीएचसी में कराते है, लेकिन एक्सरे निजी पैथालॉजी में कराते है। एक्सरे मशीन को इंस्ट्राल कराने के लिए सपा एमएलसी लीलावती कुशवाह के अलावा दूसरे जनप्रतिनिधि भी उठा चुके है। बावजूद न तो सीएचसी प्रभारी पर इसका कोई प्रभाव पड़ा है न ही सीएमओ पर।
मधुबन तहसील के फतेहपुर मंडाव स्थित पीएचसी को 11 साल पहले उच्चीकृत कर सीएचसी का दर्जा दिया गया। जिससे फतेहपुर मंडाव ब्लाक के 2 लाख 90 हजार की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। लेकिन इस अस्पताल को वर्तमान में खुद प्रशासन-शासन द्वारा उपचार करने की जरुरत है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ संसाधनों का अभाव है। वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या है एक्सरे की जांच नहीं होना। जबकि तीन वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से शासन ने यहां एक्सरे मशीन भेजा जा चुका है। लेकिन यहां के जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह है कि इन तीन वर्षो में आज तक इस मशीन को इंस्ट्राल तक नहीं किया जा सका है।
उधर इस समस्या को दूर करने के बजाए जिले के जिम्मेदारों ने यहां एक्सरे के लिए तैनात किए गए टेक्नीशियन को ही रतनपुरा सीएचसी अटैच कर दिया गया। वहीं सृजित पद के अनुसार यहां पर नौ डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मात्र चार डॉक्टर ही मौजूद है। वही बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत चिकत्सक, जनरल सर्जन, जनरल फिजिशियन अस्पताल को न मिलने के कारण गंभीर बीमारियों में जिला मुख्यालय को जाना पड़ता है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने कहा कि चिकित्सकों की कमी है। उपलब्ध संसाधनों के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधाएं दी जाती हैं। समस्याओं के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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साहब लोग: जनप्रतिनिधियों तक की नहीं सुनते
मधुबन। तीन वर्ष बाद भी एक्स-रे मशीन नहीं लगाए जाने का मामला बीते फरवरी माह में विधान परिषद सदस्य लीलावती कुशवाहा ने विधान परिषद में उठाते हुए एक्स-रे मशीन नहीं लगाए जानें के बारे में स्वास्थ्य मंत्री से प्रश्न किया था। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के संबंध में जानकारी मांगी थी। इसके बावजूद समस्या जस की जस बनी है।