दुबारी (मऊ)। घाघरा के कहर से एक बार फिर किसानों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है। बरहजघाट से खैरा तक लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में कटान तेज हो गई है। कृषि योग्य भूमि नदी में विलीन होती भूमि को लोग दूर से ही निहार रहे हैं। शिकायत के बाद भी कटान रोकने का उपाय नहीं किया जा सका है।
मधुबन तहसील क्षेत्र के धर्मपुर बिशुनपुर, दुबारी, मोलनापुर सहित विभिन्न गांवों में घाघरा के उग्र रख से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। सैकड़ों किसानों ने कर्ज लेकर गेहूं की बुआई करा दी। लेकिन अब कटान जारी रहने से लोगों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है।
लगभग छह एकड़ से अधिक जमीन नदी में विलीन हो रही है। शिकायत के बाद भी कटान रोकने का उपाय नहीं किया जा सका है। कटान रोकने के लिए बिंटोलिया गांव के ग्रामीणों ने लगातार एक वर्ष तक धरना प्रदर्शन किया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका।
इस संबंध में क्षेत्र के रघु प्रसाद, रामायन, विरेंद्र, बासदेव, हरि, लल्लन प्रसाद, लालचंद का कहना है कि घाघरा नदी लगातार कटान कर रही है। आला अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन कटान रोकने का उपाय नहीं नहीं किया जा सका है। कर्ज लेकर गेहूं की बुआई की गई है, लेकिन कटान होने से लागत भी डूबने लगी है।
कटान समस्या का समाधान अविलंब नहीं किया गया तो हम आंदोलन करने को बाध्य होंगे। कटान के मामले में उपजिलाधिकारी मधुबन लालबाबू दुबे का कहना है कि घाघरा से हो रही कटान का मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि ग्रामीण इस तरह की समस्या के बारे में बताएं तो उनकी समस्या को दूर किया जाएगा।