अत्यधिक जल दोहन और बारिश कम होने से जलस्तर तेजी से खिसकता जा रहा है। धरती की कोख इस कदर सूखने लगी है कि हैंडपंपों से लेकर नलकूपों की बारिंग फेल हो रही हैं। जनपद के बड़रांव तथा रानीपुर ब्लाक सेमी क्रिटिकल जोन के रूप में चिह्नित किए गए हैं। भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री जल संचयन योजना का क्रियान्वयन महज खानापूर्ति बन कर रह गई है। लाखों की लागत से खोदे गए अधिकांश पोखरियों में धूल उड़ रही है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी इनमें पानी नहीं भरवाया जा सका है।
कई वर्षों से सूखा पड़ने के चलते भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसकता जा रहा है। हालत यह है कि पिछले 10 वर्षों में जहां 70 फीट पर शुद्ध पानी मिल जाता था। अब 180 फीट बोरिंग करने पर भी शुद्ध पानी नहीं मिल रहा। वर्ष 2004 से ही कम बारिश हो रही है। पिछले दो वर्ष से सूखा पड़ रहा है। नलकूपों की बोरिंग भी फेल हो गई है। बड़रांव तथा रानीपुर ब्लाक में ज्यादा जल दोहन होने के चलते भूगर्भ जल विभाग ने इन्हें सेमी क्रिटिकल के रूप में चिह्नित किया है। सूत्रों की मानें तो शासन की ओर से बरसात के जल को संचयन करने के लिए मास्टर प्लान के नक्शे के मुताबिक मकान बनाए जाने का आदेश है। नक्शे में नए मकान में बरसात के पानी को रिचार्ज करना है, लेकिन संबंधित विभाग गंभीर नहीं है।
भूगर्भ विभाग के अधिकारी जिले का जलस्तर लगभग 7.5 मीटर बताकर स्थिति ठीक होने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
बढुआगोदाम क्षेत्र के रामनाथ यादव, मंडुसरी क्षेत्र के श्रीराम सिंह, मनोहर यादव, जनार्दन प्रसाद, रविंद्र वर्मा का कहना है कि भूगर्भ जल स्तर नीचे खिसकने से प्रतिवर्ष गर्मी मेें पानी के लिए गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। इस बाबत भूगर्भ जल विभाग के अवर अभियंता जैनेंद्र कुमार का कहना है कि बड़रांव तथा रानीपुर ब्लाक को सेमी क्रिटिकल के रूप में चिह्नित किया गया है।