मऊ। जनपद में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों के इलाज के लिए विभागीय अस्पताल नहीं है। जिले में अस्पताल न होने से पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों तथा सैनिकों को इजाल और अन्य जरूरतों के लिए दूसरे जनपदों में जाना पड़ता है। जिले में सैनिकों के लिए अस्पताल ईसीएचएस खोलने की मांग भूतपूर्व सैनिक संगठन की ओर से कई दशकों से की जा रही है।
जिले से देश की सीमा की रक्षा करते हुए जनपद के 18 सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी है। इनके अलावा जिले में 4500 से अधिक सैनिक अभी भी देश की विभिन्न सीमाओं पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में जिले में भूतपूर्व सैनिकों की संख्या छह हजार से अधिक है। लेकिन कई दशकों की मांग के बाद जिला मुख्यालय पर एक साल पहले जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र का अपना भवन बन सका है। लेकिन अभी भी सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों के इलाज के लिए कोई अस्पताल नहीं है। इसीएचएस न होने की वजह से सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों को इलाज के लिए पड़ोसी जनपदों गाजीपुर, आजमगढ़ अथवा वाराणसी जाना पड़ता है। अवकाश पर घर आए सैनिकों को मेडिकल अवकाश अथवा अन्य चिकित्सीय जरूरतों के लिए गैरजनपदों को जाना पड़ता है।
क्या कहते हैं भूतपूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारी
मऊ। भूतपूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष जितेंद्र नाथ दुबे कहते हैं कि संगठन की ओर से कई दशकों से मांग की जा रही है लेकिन जिम्मेदार उच्चाधिकारियों के रुचि न लेने के कारण जनपद में अभी तक ईसीएचएस की स्थापना नहीं हो सकी है। इससे सैनिकों और भूतपूर्व सैनिकों को परेशानी का सामाना करना पड़ता है। संगठन के संरक्षक शिवचंद राजभर कहते हैं जिले में ईसीएचएस होता तो भूतपूर्व सैनिकों को जिले में इलाज की सुविधा होती लेकिन जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता से अब तक यह जिले में सुलभ नहीं हो सका है। संगठन के रतनपुरा ब्लाक अध्यक्ष परमात्मानंद सिंह का कहना है कि पूरे तन मन से देश की सेवा करने वाले सैनिकों ,भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवार के लिए इसीएचएस की स्थापना के प्रावधान हैं। इसके निर्माण के लिए संगठन की ओर से ईसीएचएस की स्थापना के लिए कई सालों से मांग की जा रही है। भूतपूर्व सैनिक सभाजीत सिंह कहते हैं कि जिले में ईसीएचएस का निर्माण कराया जाना बहुत जरूरी है।
इस मामले में जिला सैनिक कल्याण एवं पुनवार्स के कमांडर अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में सैनिकों, पूर्व सैनिकों के लिए ईसीएचएस के निर्माण के लिए मैंने अपने स्तर से उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। उच्च अधिकारियों की स्वीकृति के बाद ईसीएचएस के निर्माण संभव हो सकेगा।