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Mau News: दूसरा वित्तीय वर्ष बीतने को आया, नहीं खुले 307 आरआरसी के ताले नहीं खुले

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सरवां में क्षतिग्रस्त आरारसी। संवाद
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गांवों में कचरा प्रबंधन के इंतजाम फेल होते नजर आ रहे हैं। दूसरा वित्तीय वर्ष बीतने में 11 दिन शेष हैं, लेकिन इस बार भी जिले के 307 आरआरसी (कचरा निस्तारण केंद्र) के ताले नहीं खुले। कुछ जगहों पर देखभाल न हो पाने से दरवाजे और दीवारें भी टूट गई हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में जिले की 344 ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया गया है। कचरा उठाने के लिए 1.50 लाख रुपये खर्च कर घर-घर से कचरा उठाने के लिए ई-रिक्शा भी दिए गए हैं लेकिन इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
26 मॉडल ग्राम पंचायतों सहित कुछ अन्य जगहों पर अधिकारियों के दबाव में कभी-कभी ताले तो खुलते हैं, लेकिन सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए। ताले बंद रहने से घास और खर-पतवार उग आए हैं।
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रतनपुरा ब्लॉक की 41 ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया गया है, जिनमें से 18 पंचायतों में ई-रिक्शा खरीदे गए हैं। बृहस्पतिवार को तीन टीमें गाढ़ा, दतौड़ा, नगवा, गुलौरी, नसीराबाद कला, इटैली, मेउड़ी कला, लसरा, बीबीपुर, सिधवल, पीपरसाथ ग्राम पंचायतों में पहुंचीं।
बीबीपुर और लसरा में गीला-सूखा कचरा तो नहीं मिला, लेकिन घास-फूस जरूर मिले। ई-रिक्शा ग्राम प्रधान के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। कोपागंज ब्लॉक के धवरियासाथ, नौसेमर, बसारतपुर, शहरोज गांव में भी ताले बंद मिले।
मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के शमशाबाद, दतौली, दपेहड़ी, नेवादा, चकशहजा, भतड़ी, माहपुर, हिंडोला, टेकई, बरदहपुर, गालिबपुर, खुशामदपुर और मालव ग्राम पंचायतों की आरआरसी पर ताले बंद मिले। वहीं, करहां और राजापुर में सूखा और गीला कचरा रखा पाया गया।
परदहां ब्लॉक के सरवां ग्राम पंचायत की आरआरसी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, अंदर ईंट-पत्थर पड़े हैं। दोरीघाट ब्लॉक के सुग्गीचौरी और पनईल की आरआरसी में ताले बंद मिले।
फतहपुर मंडाव ब्लॉक के तिनहरी में आरआरसी अधूरी है। ढढवल पटराव और सिंहासन में ताले बंद मिले। बड़राव ब्लॉक के अतरसावा, उसरी खुर्द और मुहम्मदाबाद सिपाह के ग्रामीणों ने बताया कि कचरा केवल 10 दिन में एक बार उठाया जाता है।

इनसेट -
जनसंख्या के आधार पर मिला था बजट
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों की जनसंख्या के आधार पर बजट आवंटित किया गया था। जिस ग्राम पंचायत की आबादी पांच हजार से अधिक थी, उनमें प्रतिव्यक्ति के हिसाब से 705 रुपये और उससे कम आबादी वाली पंचायतों में 340 रुपये प्रति व्यक्ति बजट दिया गया। इस पैसे में नालियों में फिल्टर चेंबर बनाने के लिए कार्ययोजना के आधार पर 1500 से 2500 रुपये दिए गए थे, ताकि पोखरी में शुद्ध पानी और नाली सफाई को आसान किया जा सके। लेकिन फिल्टर चेंबर की दीवारों में भी दरारें पड़ गई हैं।

सभी ग्राम पंचायतों में आरआरसी नहीं बने हैं। जहां बने हैं उसे संचालित करने के लिए सभी प्रधान और सचिवों को प्रशिक्षण मिला है। टीम गठित कर जांच कराई जाएगी, संचालित होता न पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। - कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ
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