नगर के सिंधी कालोनी में आयोजित श्रीराम कथा में उपस्थित श्रद्धालु।संवाद
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दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के तत्वावधान में नगर के सिंधी कालोनी में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के सातवें दिन किशोरी शरण महाराज ने कहा कि रामायण त्याग तपस्या प्रेम तथा समरसता और सद्भावना के साथ आदर्श की शिक्षा देता है।
वहीं गीता कर्म के प्रति निष्ठा रखते हुए धर्म के पालन और अधिकार का यथार्थ ज्ञान देता है। कहा कि गीता में सोलह अध्यायों की शिक्षा देने के बाद अर्जुन का मोह भंग हुआ और युद्ध के लिए कमर कस लिया।
ठीक इसके विपरीत मिथिला में धनुष भंग होने से क्रुद्ध भगवान परशुराम को श्रीराम जी ने विनम्रता तथा समर्पण और प्रेम की बात कर इतना प्रभावित कर दिया कि वे अपने सभी अस्त्र शस्त्र अभिमान और क्रोध छोड़ कर इंद्र लोक चले गए।
कहा कि इतिहास में पहली बार बिना दूल्हे की बारात अयोध्या से मिथिला के लिए हाथी घोड़ा और रथ पर सवार होकर चली। गुरुदेव ने विवाह की रीतियों का स्वागत गीत का सजीव चित्रण किया।
आज मिथिला नगरिया निहाल साखियां भजन पर सभी श्रोतागण झूमते रहे। इस अवसर पर श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के पुजारी विवेकानंद पांडेय ने सभी सनातनियों का स्वागत अभिनंदन किया।
इस दौरान अजय मिश्र, बब्बन सिंह, अनिल शर्मा, रामगोपाल, डॉ. कुसुम वर्मा, देवेंद्र मोहन सिंह, आनंद गुप्ता, कैलाश चंद जायसवाल, पंकज जायसवाल, श्रवण मद्धेशिया आदि शामिल थे।