मऊ। बीते चार दिन से शीतलहर और कोहरे का प्रकोप जारी है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सुबह घना कोहरा होने के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। ठंड हवाओं के कारण दिन में भी लोग ठिठुरते नजर आए। धूप नहीं निकलने से लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली। वहीं कही अलाव भी नजर नहीं आया। बाजारों से लेकर सड़क मार्गों पर ठंड का असर दिखा।
शुक्रवार को शीतलहर के चलते आम आदमी ठिठुरता दिखाई दिया। ठंड के साथ सुबह छाए घने कोहरे ने जिंदगी थाम सी दी। सड़कों पर सुबह से ही सामने के वाहनों की लाइट भी दिखाई नहीं दी। सड़कों पर सुबह का आवागमन प्रभावित रहा। वाहन दिन में धूप नहीं निकलने से ठंड से राहत नहीं मिली।
कब जलेंगे सार्वजनिक जगहों पर अलाव
मऊ। जिले में भीषण ठंड के दस्तक दिए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन इससे बचाव को लेकर जिम्मेदारों द्वारा अब तक रैनबसेरा बनाने के अलावा कोई कदम नहीं उठाया गया है। जिले के किसी भी प्रमुख मार्ग, बाजार आदि सार्वजनिक जगहों पर रात में अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
तापमान लुढ़कने पर भी बढ़े मच्छर
मऊ। शरीर कंपा देने वाली ठंड में भी मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो सका है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। सर्दी में भी मच्छरों का असर कम नहीं हो रहा है। सुबह और शाम मच्छरों के चलते हाल बुरा है। दिन ढलते ही मच्छर हावी रहते हैं। शहर के साथ ही गांवों में समस्या अधिक है। मच्छरों के नहीं मरने के पीछे दिन और रात का तापमान कारण बना है। रात का तापमान लगातार नीचे गिर रहा है, जबकि दिन में धूप खिलने से लार्वा को मजबूती मिलती है। ऐसे में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, लेकिन यह संख्या में कम हैं।
ठंड में रोगी रखें खास ख्याल
मऊ। हृदय रोगियों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत है। इस मौसम में रक्त वाहिनियों में अतिरिक्त कॉलस्ट्रॉल बढ़ने से हृदय के कई रोग घेर लेते हैं। सांस के रोगियों के लिए भी यह मौसम परेशानियों भरा होता है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलष कुशवाह बताते हैं कि सर्दी में खून की धमनियां सिकुड़ने लगती है। हार्ट को खून पंप करने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ने लगता है। यही स्थिति हार्ट अटैक की वजह बन जाती है। हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों को ठंड में खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। हृदय रोगी सर्द हवा के दौरान बाहर न निकलें। यदि जाना जरूरी तो शरीर को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढककर रखें। मफलर, कैप आदि जरूर पहनें। घी, तेल आदि चिकनाई वाला भोजन न करें।
किसान फसलों पर छिड़कें दवाएं
मऊ। कड़ाके की ठंड और कोहरे से जनजीवन अस्त व्यस्त है। लेकिन अभी इसका असर खेती किसानी पर ज्यादा नहीं पड़ रहा है। भारतीय बीज विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ कृषि वैैज्ञानिक डॉ. गोविंद्र पाल ने बताया कि वर्तमान में पड़ रही ठंड का असर इस समय केवल आलू की फसल को प्रभावित कर सकता है। आलू की फसल को पाला से बचाने के लिए किसान दस दिन के अंतराल पर मैंगोजेब दवा का छिड़काव करें।