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जलस्तर बढ़ने की रफ्तार तेज होने से खतरे में है ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व

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घाघरा के जलस्तर बढ़ने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों में खलबली मच गई है। घाघरा नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 40 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी भारत माता मंदिर की लहरें दीवारों पर टक्कर मार रही रही है। इससे ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
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बृहस्पतिवार को नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 40 सेमी की वृद्धि होने से नगर सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है। अब नदी के जलस्तर की रफ्तार तेजी से बढ़ने से लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। बंधों से नदी अब सीधे टकराकर बहने से लोगों के रोंगटे खड़े हो गए हैं।वही अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाले तो बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 69.60मीटर रहा। जबकि बुधवार को 69.20 मीटर था। घाघरा अभी खतरा बिंदु से 30 सेमी नीचे बह रही है। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। नदी के उग्र रुप धारण करने से एक ओर जहां नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर,दुर्गा मंदिर,खाकी बाबा की कुटी,डीह बाबा का मंदिर,लोक निर्माण का डाक बंगला,हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडराने लगा है।वहीं तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार,नवली, चिऊटीडांड, पतनई,सरया,बीबीपुर,गोधनी,ठाकुर गांव,गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, महुआ बारी,ठीकरहिया, महाबारी,रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवों में पानी घुसने के डर से लोग दहशत में जी रहे हैं।भारत माता मंदिर पर घाघरा की तेज लहरे टक्कर मार रही है,जिससे मंदिर पर खतरा बढ़ गया है।हालांकि सिंचाई विभाग के कर्मचारी मंदिर को बचाने के लिए नदी में बोल्डर डालते देखे गए।
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