मऊ। तहसीलों में मनमानी और धांधली से वादकारियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। कुछ ऐसा ही मामला मधुबन तहसील के बाद अब मऊ सदर तहसील में आया है। सदर तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील कुमार राय, मंत्री तेज बहादुर सिंह समेत अन्न अधिवक्ताओं ने तहसीलदार पर मुकदमों की 25 फाइलों में नियम को ताक पर रखकर आदेश करने का आरोप लगाया है। इससे नाराज अधिवक्ता सोमवार से कार्य बहिष्कार पर हैं।
तहसील अधिकारियों ने इन आदेशों से खुद को अनजान बताया है और जांच की बात कही है। तहसीलदार न्यायिक कोर्ट में 15 ग्राम पंचायतों के 25 मुकदमे चल रहे थे। सदर तहसील में तहसीलदार न्यायिक का पद बीते 10 साल से खाली चल रहा है, जिसके चलते सदर तहसीलदार ही इस कोर्ट के मुकदमों की सुनवाई करते हैं।
सात मार्च 2025 को इन 25 फाइलों में सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारण सुनवाई नहीं होने से इन फाइलों में सुनवाई के लिए 21 मार्च 2025 की तारीख दी गई थी। 21 मार्च को वादकारी और अधिवक्ता कोर्ट में पहुंचे फाइलों की स्थिति देखने के लिए तो पता चला कि इन 25 फाइलों में सुनवाई की तारीख से 10 दिन पहले 12 मार्च को ही तहसीलदार ने आदेश कर दिया है। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के पेशकार और उप जिला शासकीय अधिवक्ता पर भ्रष्टाचार की नीयत से इन फाइलों में आदेश करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर दिया।
गैंगस्टर में कुर्क जमीन कर दी थी नामांतरित
मधुबन तहसीलदार ने 27 फरवरी 2024 को गैंगस्टर में कुर्क 25 कड़ी जमीन को बीते 3 मार्च को आरोपी की बहन के नाम ट्रांसफर कर दी थी। कुर्की के समय जिलाधिकारी ने तहसीलदार मधुबन को ही रिसीवर बनाया था। मामला उजागर होने पर आरोपी, उसकी पत्नी और बहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि अभी विभागीय जांच चल रही है, उसमें कई राजस्वकर्मियों का भी नाम सामने आ सकता है।
निर्धारित तिथि से पहले फाइलों में आदेश करना जांच का विषय है। इन फाइलों में सुनवाई की कब तारीख दी गई थी, इसे ऑनलाइन देखना पड़ेगा। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - हेमंत चौधरी, उपजिलाधिकारी, सदर मऊ
आधिवक्ताओं ने पेशकार और शासकीय अधिवक्ता पर आरोप लगाया है। फाइलों में कैसे आदेश हो गया, इसकी जानकारी नहीं है। अभी अधिवक्ताओं से इस मामले में बातचीत नहीं हुई है। इन सभी फाइलों में दोबारा सुनवाई होगी। - उमेश सिंह, तहसीलदार, सदर तहसील मऊ