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हरी खाद के प्रयोग से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ा सकते हैं: डॉ. विनय

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कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी की ओर से बृहस्पतिवार को विकासखंड रतनपुरा के ग्राम बहरवार में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग एवं प्रबंधन पर किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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इसमें हरी खाद के प्रयोग से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने के बारे में बताया गया। कार्यक्रम के समन्वयक मृदा वैज्ञानिक पिलखी के डॉ. प्रशांत ने किसानों को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
उन्होंने आगामी फसलों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम रखते हुए अधिक से अधिक कार्बनिक खादों के प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि किसान आगामी समय में अपने खेतों में हरी खाद का प्रयोग कर नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ा सकते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं। साथ ही खेतों में अजोला, एजोस्पाइरिलम, एजोटोबैक्टर और पीएसबी कल्चर के प्रयोग पर भी बल दिया।
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केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने विभिन्न फसलों में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी और नैनो यूरिया पर भी चर्चा की।
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. सुमित कुमार ने किसानों को कंसोर्टियम के बारे में बताया। केंद्र के बीज वैज्ञानिक डॉ. हिमांशु राय ने किसानों को बीजों के टीकाकरण (बीज शोधन) पर बल दिया। इस अवसर पर बस्ती बहरवार के 75 पुरुष किसान एवं 25 महिला किसान उपस्थित रहे।
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