अखंड सौभाग्य के लिए विवाहित महिलाओं ने रविवार को हरितालिका तीज का व्रत रखा। विवाहिताओं के साथ कुुंवारी युवतियों ने भी विधि विधान से पूजन अर्चन किया। साथ ही पर्व की परंपरा के मुताबिक सुहाग की रक्षा के लिए प्रचलित पौराणिक कहानियां भी सुनी।
बता दें कि इस पर्व की परंपराएं भी करवाचौथ जैसे व्रत पर्व से काफी हद तक समान है। रविवार को पर्व की परंपराओं के मुताबिक सुहागिनों ने बांस या मिट्टी के बर्तन में रखकर फल व वस्त्र दान किया। साथ ही उन्होंने सुहाग के जोड़े में सजकर पूजन किया। इस मौके पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से शिव पार्वती और गणेश की एक साथ पूजा विधिविधान से की। इस पूजा में उन्होंने पुष्प, धूप और नैवेद्य भी चढ़ाए। मां पार्वती की प्रतिमा का सुहागिन के रूप में श्रृंगार किया गया।
मान्यता है कि श्रद्घा पूर्वक व्रत करने पर मां पार्वती व भगवान शंकर निश्चित रूप से अखंड सौभाग्य की कामना पूरी करते हैं। बताया जाता है कि मां पार्वती जी ने प्रभु शिव के लिए इस व्रत को किया था। पर्व को मनाने को लेकर मान्यता यह भी है कि इस व्रत को करने से भगवान अखंड सौभाग्य का वर देते हैं। इस व्रत को सर्वप्रथम मां पार्वती ने प्रभु शिव के लिए किया था।
इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की कथा सुनती हैं। मां पार्वती ने भाद्रपथ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह व्रत किया था इसीलिए इस वक्त पर्व मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कई स्थानों पर कुवांरी कन्याएं भी अच्छे वर प्राप्ति की कामना को लेकर तीज का व्रत रखती हैं।